
नई दिल्ली: टाटा ग्रुप के अधिग्रहण के बाद पुनर्गठन के दौर से गुजर रही एयर इंडिया के लिए यह खबर राहत देने वाली नहीं है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयर इंडिया के एक पायलट को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस जून 2025 में टोक्यो से दिल्ली आ रही एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सामने आई गंभीर तकनीकी और सुरक्षा खामियों से जुड़ा है।
विमान में बढ़ा तापमान, कोलकाता में करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग
DGCA के अनुसार, बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान से संचालित फ्लाइट AI 358 (टोक्यो–दिल्ली) के दौरान विमान के केबिन का तापमान अचानक असामान्य रूप से बढ़ गया, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा हुई। हालात को देखते हुए विमान को कोलकाता में डायवर्ट करना पड़ा।
DGCA ने जताई गंभीर सुरक्षा चिंता
DGCA ने 29 दिसंबर 2025 को जारी नोटिस में कहा है कि फ्लाइट AI 358 और AI 357 (दिल्ली–टोक्यो) के संचालन के दौरान विमान को उड़ान के लिए भेजने, मिनिमम इक्विपमेंट लिस्ट (MEL) के पालन और फ्लाइट क्रू द्वारा लिए गए निर्णयों को लेकर गंभीर सुरक्षा संबंधी खामियां सामने आई हैं।
धुएं की गंध और बार-बार खराबी के बावजूद उड़ान
नोटिस में एक अन्य घटना का भी उल्लेख है, जिसमें दिल्ली से टोक्यो जा रही फ्लाइट के दौरान केबिन में धुएं जैसी गंध महसूस की गई थी। DGCA के अनुसार, इस तरह की समस्या पहले भी कम से कम पांच बार सामने आ चुकी थी, जो विमान के सिस्टम में पहले से मौजूद खराबी की ओर इशारा करती है।
इसके बावजूद, संबंधित विमान VT-ANI को ऐसे MEL आइटम्स के साथ डिस्पैच किया गया, जो नियमों के अनुरूप नहीं थे। DGCA का कहना है कि बार-बार सामने आ रही तकनीकी खराबियों और सिस्टम से जुड़े जोखिमों की जानकारी होने के बावजूद पायलटों ने विमान को उड़ाने की अनुमति दी।
14 दिन में मांगा गया जवाब
DGCA ने स्पष्ट किया है कि 28 जून 2025 को नियमों का पालन नहीं किया गया और ऑपरेटिंग क्रू ने कई खराब सिस्टम के संयुक्त प्रभाव और उससे जुड़ी सुरक्षा जोखिमों का उचित आकलन नहीं किया। इस पर संबंधित पायलट को 14 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है कि उनके खिलाफ नियामकीय कार्रवाई क्यों न की जाए।
एयर इंडिया की प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे मामले पर एयर इंडिया की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि यह घटना जून 2025 की है और उस समय इसे आंतरिक स्तर पर सुलझा लिया गया था।
निष्कर्ष:
DGCA की सख्ती यह संकेत देती है कि उड़ान सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे एयरलाइन किसी भी समूह से जुड़ी हो।