
पुणे/मुंबई: महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे को बीड जिले की अदालत से बड़ी राहत मिली है। मुंडे की पत्नी होने का दावा करने वाली करुणा शर्मा मुंडे द्वारा दायर याचिका को अदालत ने सबूतों की कमी के हवाले से खारिज कर दिया।
करुणा मुंडे ने दावा किया था कि धनंजय ने 2024 विधानसभा चुनावों में अपने नामांकन पत्र में अहम जानकारियां छुपाई। हालांकि अदालत ने पाया कि धनंजय ने चुनाव जीतने के लिए कोई तथ्य छुपाया नहीं और इससे चुनाव परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा। न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपक बोर्डे ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने में विफल रही हैं।
शादी का कानूनी सबूत नहीं:
अदालत ने यह भी कहा कि करुणा मुंडे शादी का कोई कानूनी सबूत पेश नहीं कर पाईं। उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ — आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, वसीयत और बीमा पॉलिसी — शादी के कानूनी प्रमाण नहीं हैं।
दो पत्नी का विवाद:
धनंजय मुंडे ने अदालत में कहा कि उनकी कानूनी शादी 2001 में राजश्री मुंडे से हुई थी। करुणा मुंडे के साथ उनका संबंध सहमति आधारित था, जिससे दो बच्चे हुए। मुंडे ने बताया कि करुणा को उनकी शादी की जानकारी थी और 2020 में उनका रिश्ता टूट गया। अदालत ने प्रारंभिक जांच में पाया कि मुंडे ने चुनावी फॉर्म में किसी तथ्य को छुपाकर चुनाव जीतने का प्रयास नहीं किया।
यह राहत ऐसे समय में आई है जब धनंजय मुंडे फडणवीस सरकार में एनसीपी के कोटे से खाली मंत्री पद के लिए दावेदारी कर रहे हैं। पूर्व कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे के बाद यह पद खाली हुआ था और अब मुंडे के लिए रास्ता आसान माना जा रहा है।