Wednesday, June 17

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बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले जारी, फैक्ट्री में हिंदू गार्ड की गोली मारकर हत्या, दो हफ्तों में तीसरी घटना

 

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ढाका।

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मैमनसिंह जिले के भालुका उपजिला क्षेत्र में एक गारमेंट फैक्ट्री के भीतर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात एक हिंदू कर्मचारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह पिछले दो हफ्तों में हिंदू समुदाय से जुड़ी तीसरी हत्या की घटना बताई जा रही है, जिससे इलाके में तनाव का माहौल है।

 

मृतक की पहचान 42 वर्षीय बजेंद्र बिस्वास के रूप में हुई है, जो लबीब ग्रुप की गारमेंट यूनिट सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर कार्यरत थे। पुलिस के अनुसार, उन्हें उनके ही सहकर्मी 29 वर्षीय नोमान मिया ने गोली मार दी।

 

फैक्ट्री के भीतर चली गोली

 

घटना सोमवार शाम करीब 6:45 बजे फैक्ट्री परिसर में स्थित अंसार बैरक में हुई, जहां दोनों कर्मचारी रहते थे। पुलिस के मुताबिक, बातचीत के दौरान आरोपी नोमान मिया ने कथित तौर पर मजाक या लापरवाही में कंपनी से मिली सरकारी शॉटगन बिस्वास की ओर तान दी। इसी दौरान हथियार से गोली चल गई, जो बिस्वास की बाईं जांघ में लगी।

 

घायल अवस्था में बजेंद्र बिस्वास को तुरंत भालुका उपजिला हेल्थ कॉम्प्लेक्स ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

 

आरोपी गिरफ्तार, हथियार जब्त

 

स्थानीय थाना प्रभारी मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने बताया कि आरोपी नोमान मिया को हिरासत में ले लिया गया है और घटना में इस्तेमाल की गई शॉटगन को जब्त कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि शव को पोस्टमार्टम के लिए मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है और मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है।

 

लगातार हो रही घटनाओं से बढ़ी चिंता

 

यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब भालुका इलाके में पहले से ही तनाव व्याप्त है।

18 दिसंबर को इसी क्षेत्र में एक अन्य हिंदू व्यक्ति दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर बेरहमी से पिटाई कर, कपड़े उतारकर जिंदा जलाने की घटना सामने आई थी। इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

 

प्रशासन पर उठे सवाल

 

स्थानीय लोगों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि लगातार हो रही हिंसक घटनाओं के बावजूद अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे सामाजिक तनाव और गहराने का खतरा है।

 

 

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