Thursday, May 14

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गाजा में 3,500 सैनिक तैनात करने की तैयारी में पाकिस्तान, ट्रंप के शांति प्लान में अहम भूमिका असीम मुनीर का बड़ा दांव, अमेरिका से नजदीकी बढ़ी तो देश के भीतर उठ सकता है विरोध

इस्लामाबाद।
पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच पाकिस्तान एक बड़े और संवेदनशील कदम की तैयारी करता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन वाले गाजा शांति प्लान के तहत प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स (ISF) में शामिल होकर पाकिस्तान करीब 3,500 सैनिक गाजा पट्टी में तैनात कर सकता है। पाकिस्तानी राजनयिक और सैन्य सूत्रों के अनुसार, यह तैनाती गाजा के पुनर्निर्माण और चरमपंथी संगठनों के निरस्त्रीकरण की निगरानी के लिए की जाएगी।

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ISF, ट्रंप के 20-सूत्रीय गाजा पीस प्लान का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य युद्धग्रस्त इलाके में स्थिरता बहाल करना है। अमेरिका ने इस फोर्स के लिए मुस्लिम देशों से सैनिक, लॉजिस्टिक्स और सैन्य उपकरण देने का आग्रह किया है। इसी कड़ी में पाकिस्तान को एक प्रमुख भागीदार के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका का भरोसा, मुनीर की बढ़ती अहमियत

माना जा रहा है कि हाल के दिनों में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को दिए जा रहे महत्व के पीछे भी यही रणनीति है। अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान ISF में शामिल होकर गाजा में शांति बहाली की प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभाए।

पिछले सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पाकिस्तान गाजा में अंतरराष्ट्रीय बल के लिए सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है और यदि वह सहमत होता है तो उसकी भूमिका बेहद अहम होगी। रुबियो ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका पाकिस्तान समेत अन्य संभावित देशों के साथ इस मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहा है।

पाकिस्तान का आधिकारिक रुख: फैसला अभी लंबित

हालांकि, पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर अभी किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कहा कि ISF में भागीदारी को लेकर अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है
फिर भी यह माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व अमेरिकी अधिकारियों के साथ संभावित तैनाती पर गंभीर चर्चा कर चुका है।

घरेलू मोर्चे पर बढ़ सकता है बवाल

गाजा में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती से जहां वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के रिश्ते मजबूत हो सकते हैं, वहीं देश के भीतर इसका तीखा विरोध देखने को मिल सकता है। पाकिस्तान में पहले से ही गाजा युद्ध और इजरायल को लेकर जबरदस्त जनाक्रोश है।
इस्लामिक और कट्टरपंथी दल इसे पश्चिमी देशों और इजरायल के नेतृत्व वाली सुरक्षा पहल का हिस्सा बताकर सरकार और सेना पर मुस्लिम हितों से धोखा करने का आरोप लगा सकते हैं।

हाल ही में असीम मुनीर के वॉशिंगटन दौरे और ट्रंप से संभावित मुलाकात की खबरें भी सामने आई थीं, हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन रिपोर्टों का खंडन किया है।

निष्कर्ष

गाजा में 3,500 सैनिकों की संभावित तैनाती पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बड़ा दांव साबित हो सकती है। यह कदम अमेरिका के साथ रिश्तों को नई ऊंचाई दे सकता है, लेकिन इसके साथ ही देश के भीतर राजनीतिक और धार्मिक असंतोष को भी हवा दे सकता है। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि पाकिस्तान इस संवेदनशील मुद्दे पर कौन-सा अंतिम फैसला करता है—वैश्विक मंच पर सक्रिय भूमिका या घरेलू दबाव के आगे पीछे हटना।

 

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