Sunday, January 11

सक्सेस स्टोरी | ‘ये फौजी का हाथ है’—डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की भविष्यवाणी हुई सच, 3 साल का बच्चा आज बना भारतीय सेना का अफसर

कुछ पल ऐसे होते हैं, जो जिंदगी की दिशा तय कर देते हैं। दिसंबर 2006 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) की पासिंग आउट परेड के दौरान ऐसा ही एक पल आया था, जब तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने तीन साल के एक बच्चे का हाथ थामकर मुस्कुराते हुए कहा था— “ये फौजी का हाथ है।”
आज, करीब 19 साल बाद, कलाम साहब के वही शब्द इतिहास बन गए हैं। वही बच्चा, हरमनमीत सिंह, अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर उसी IMA परेड ग्राउंड में वर्दी पहने खड़ा है।

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बचपन में देखा सपना, आज पहन ली वर्दी

कानपुर निवासी हरमनमीत सिंह को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। महज तीन साल की उम्र में किंडरगार्टन के दौरान भी उन्होंने अपनी टीचर से कहा था कि वह एक दिन जेंटलमैन कैडेट (GC) बनेंगे।
पढ़ाई में भी हरमनमीत शुरू से अव्वल रहे। उन्होंने कक्षा 10वीं और 12वीं दोनों में टॉप किया। हालांकि परिवार में इंजीनियरिंग और IIT जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई, लेकिन उनका लक्ष्य एक ही था— भारतीय सेना

पिता की ही रेजिमेंट में मिली पहली पोस्टिंग

22 वर्षीय लेफ्टिनेंट हरमनमीत सिंह को मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (MCTE) के कैडेट्स ट्रेनिंग विंग में टेक्निकल एंट्री स्कीम (46वां कोर्स) के तहत प्रशिक्षण मिला। शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया।
सबसे खास बात यह रही कि उनकी पहली तैनाती 6 मराठा लाइट इन्फैंट्री में हुई है— वही रेजिमेंट, जिसमें उनके पिता कर्नल हरमीत सिंह सेवाएं दे चुके हैं। यह पल पिता-पुत्र दोनों के लिए बेहद भावुक और गर्व से भरा रहा।

सेना में चौथी पीढ़ी, शौर्य की विरासत

हरमनमीत सिंह सेना में शामिल होने वाले अपने परिवार की चौथी पीढ़ी हैं।

  • परदादा स्व. सूबेदार प्रताप सिंह (1948 में सेना में भर्ती)
  • दादा स्व. सिपाही दलजीत सिंह
  • दादा के भाई स्व. मेजर भगवंत सिंह और कर्नल उजागर सिंह (सेवानिवृत्त)
  • पिता कर्नल हरमीत सिंह

अब इस गौरवशाली परंपरा को लेफ्टिनेंट हरमनमीत सिंह ने आगे बढ़ाया है।

मां की आंखों में गर्व के आंसू

हरमनमीत की मां हरवीन रीन ने कहा,
“अपने पति और बेटे को एक साथ देश की सेवा करते देखना मेरे जीवन का सबसे बड़ा गर्व है। IMA में जब बेटे के कंधों पर सितारे लगे, तो पूरा परिवार भावुक हो गया।”

हरमनमीत बोले— ‘आज मेरा सपना पूरा हुआ’

लेफ्टिनेंट हरमनमीत सिंह कहते हैं,
“बचपन से अपने पिता को वर्दी में देखा, IMA में कई पासिंग आउट परेड देखीं। मेरे लिए सेना के अलावा कोई और सपना था ही नहीं। आज मैंने आखिरकार अपना सपना पूरा कर लिया।”

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के शब्दों से शुरू हुई यह यात्रा आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। यह कहानी बताती है कि सपने अगर सच्चे हों और मेहनत ईमानदार, तो इतिहास खुद रास्ता बना देता है।

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