Sunday, June 21

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ट्रंप की खुशामद पड़ी भारी, गाजा में सेना भेजने के दबाव में फंसा पाकिस्तान

हमास को निरस्त्र करने की जिम्मेदारी देने पर असीम मुनीर की अग्निपरीक्षा

भारत को रणनीतिक रूप से काउंटर करने की जल्दबाजी में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से नजदीकियां बढ़ाना पाकिस्तान को अब भारी पड़ता दिख रहा है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर अमेरिका गाजा पट्टी में आतंकी संगठन हमास को निरस्त्र करने के लिए पाकिस्तानी सेना भेजने का दबाव बना रहा है।

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मामले से जुड़े दो वरिष्ठ सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिका ने एक बार फिर असीम मुनीर को वॉशिंगटन तलब किया है। यदि यह दौरा होता है, तो पिछले छह महीनों में यह उनकी तीसरी अमेरिका यात्रा होगी, जिसमें गाजा संकट मुख्य एजेंडा रहेगा।

गाजा प्लान और मुस्लिम देशों की सेना

रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तैयार किए गए 20 सूत्रीय गाजा स्थिरीकरण प्लान में मुस्लिम देशों की सेनाओं को गाजा में तैनात करने का प्रस्ताव है। इन सेनाओं को गाजा के पुनर्निर्माण, शांति स्थापना और सबसे अहम — हमास से हथियार छीनने की जिम्मेदारी सौंपी जानी है। अमेरिका इस मिशन में पाकिस्तान की अहम भूमिका चाहता है।

पाकिस्तान के लिए दोतरफा संकट

हालांकि पाकिस्तान की स्थिति बेहद नाजुक है। विदेश मंत्री इशाक डार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पाकिस्तान शांति स्थापना के लिए सैनिक भेजने पर विचार कर सकता है, लेकिन हमास को निरस्त्र करना उसका काम नहीं है

विशेषज्ञों का मानना है कि गाजा में सेना भेजना पाकिस्तान के लिए राजनीतिक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। पाकिस्तान में इमरान खान के समर्थक पहले से सड़कों पर हैं, जबकि इस्लामिक संगठन किसी भी वक्त गाजा मुद्दे पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन खड़े कर सकते हैं।

घर में आग, बाहर मिशन?

गौरतलब है कि सिर्फ इजरायल-हमास युद्धविराम के दौरान ही पाकिस्तान में हिंसा भड़क उठी थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए असीम मुनीर को कड़े सैन्य आदेश देने पड़े थे। ऐसे हालात में यदि गाजा में पाकिस्तानी सेना भेजी जाती है, तो देश के भीतर गृह संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

ना भेजें तो ट्रंप नाराज़, भेजें तो देश में विस्फोट

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि पाकिस्तान इस अमेरिकी प्रस्ताव को ठुकराता है तो इससे ट्रंप नाराज़ हो सकते हैं, जो फिलहाल पाकिस्तान में अमेरिकी निवेश और सुरक्षा सहयोग दोबारा शुरू करने के इच्छुक हैं। वहीं, यदि सेना भेजी जाती है, तो पाकिस्तान में धार्मिक और राजनीतिक उबाल आना तय माना जा रहा है।

असीम मुनीर की सबसे बड़ी परीक्षा

भारत को रणनीतिक रूप से घेरने के लिए जिस रिश्ते को असीम मुनीर ने जल्दबाजी में मजबूत किया था, वही रिश्ता अब उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। गाजा में सेना भेजने का फैसला करें या इनकार करें — दोनों ही हालात में पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख के सामने भारी राजनीतिक कीमत चुकाने की नौबत खड़ी है।

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