Sunday, June 21

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गैंगस्टर गिरफ्तारी से बचने के लिए बदलते हैं राज्य, पूरे NCR के लिए विशेष एजेंसी की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बढ़ते संगठित अपराधों और गैंगस्टरों द्वारा एक राज्य से दूसरे राज्य में भागकर गिरफ्तारी से बचने की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि NCR के लिए एक ऐसा कानून बनाया जाए, जिससे एक ही एजेंसी को सभी राज्यों में सक्रिय गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार मिले और आरोपियों को विशेष अदालत में पेश किया जा सके।

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पूरे NCR में विशेष अदालत की जरूरत

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, “पूरे NCR के लिए एक कानून क्यों नहीं बनाया जा सकता? यूएपीए, पीएमएलए और एनडीपीएस जैसे केंद्रीय कानूनों के मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाई जाएं, जहां अपराध कहीं भी हुआ हो, मुकदमे वहीं चल सकें।”

जुरिस्डिक्शन का फायदा उठाते हैं गैंगस्टर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर अक्सर एक राज्य में अपराध कर दूसरे राज्य में चले जाते हैं, ताकि गिरफ्तारी टल सके और मुकदमे में देरी का फायदा उठाकर जमानत ले सकें। जस्टिस बागची ने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर कोई गैंगस्टर हरियाणा में 10, राजस्थान में पांच और दिल्ली में दो अपराध करता है, तो एनआईए जांच कर सकती है और आरोपी का ट्रायल NCR की एक ही अदालत में हो सकेगा।”

अपराधियों की रणनीति और समाधान

अदालत ने कहा कि केंद्रीय कानूनों के तहत गंभीर अपराधों में संगठित गिरोह एनसीआर में क्षेत्राधिकार की कमियों का अनुचित लाभ उठाते हैं। समय पर पुलिस कार्रवाई और त्वरित सुनवाई के लिए जरूरी है कि एक ही स्थान पर सक्षम और विशेष अदालतें हों। ऐसा न होने पर खतरनाक अपराधी ट्रायल में देरी का फायदा उठा कर जमानत पा लेते हैं, जो समाज और जनता के हित में नहीं है।

विशेष अदालतों की स्थापना

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा अदालतों को विशेष अदालत घोषित नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय एनआईए मामलों के लिए अलग और विशेष अदालतें बनाई जाएं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने एनआईए मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने पर होने वाले खर्च के लिए राज्यों को प्रति अदालत एक करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति मंजूर की है। दिल्ली सरकार ने भी तीन महीने के भीतर केंद्रीय कानूनों के तहत मामलों की सुनवाई के लिए 16 विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्णय लिया है।

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