Monday, June 29

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देवता को आराम तक नहीं, SC ने बांके बिहारी मंदिर की विशेष पूजा पर जताई चिंता

मथुरा: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में पैसों के बदले संपन्न श्रद्धालुओं को विशेष दर्शन कराने की प्रथा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी व्यवस्था से देवता के निर्धारित विश्राम समय में बाधा आती है।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को यह टिप्पणी करते हुए कहा, “जब मंदिर दोपहर में देवता के विश्राम के लिए बंद रहता है, उस समय भी विशेष दर्शन कराए जाने से देवता को एक मिनट का भी आराम नहीं मिलता। यही समय देवता का सबसे अधिक शोषण होता है।”

यह मामला गोस्वामी समुदाय के सदस्यों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मंदिर के विश्राम काल में भी विशेष पूजा और दर्शन कराए जाते हैं, जिससे परंपरागत धार्मिक अनुष्ठान प्रभावित होते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि मंदिर में ग्रीष्म और शीत ऋतु के लिए अलग-अलग दर्शन समय ऐतिहासिक रूप से निर्धारित हैं और यह समय निर्धारण अत्यंत पवित्र है।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन, मंदिर प्रबंधन समिति और उच्चाधिकार प्राप्त समिति को नोटिस जारी किया है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई जनवरी के पहले सप्ताह में निर्धारित की गई है।

बेंच ने कहा कि भीड़ प्रबंधन और भगदड़ से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कोई भी निर्देश व्यावहारिक और सख्ती से लागू होना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि कुप्रबंधन का असर अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ता है।

इस साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के दैनिक संचालन की निगरानी के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था। यह समिति उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 के तहत राज्य-नियुक्त समिति के निलंबन के बाद मंदिर प्रबंधन कर रही है।

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