मेरठ: हत्या और अपहरण के बाद कपसाड़ गांव में बढ़ा तनाव, दलित और ठाकुर समुदायों में खामोशी के बीच बढ़ती बेचैनी
मेरठ के कपासाड़ गांव में 45 वर्षीय सुनीता की हत्या और उसकी 20 वर्षीय बेटी रूबी के अपहरण की घटना ने पूरे गांव में सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर दिया है। पीड़ित परिवार ने बेटी की सकुशल वापसी तक अंतिम संस्कार न करने का ऐलान किया है, जिससे प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है।
गांव में फैला तनाव
गांव की अनुसूचित जाति बस्तियों में आक्रोश साफ देखा जा रहा है। लोग मान रहे हैं कि यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के आत्मसम्मान से जुड़ा मामला है। ठाकुर बस्तियों में पुलिस की आवाजाही और बाहरी लोगों की मौजूदगी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। भले ही दोनों पक्ष खुलकर सामने न आए, लेकिन भीतर ही भीतर तनाव गहराता जा रहा है।
पहली बार हुआ जातीय तनाव
कपासाड़ गांव में करीब 15 हजार लोग रहते हैं, जिनमें लगभग 9 हजार ठाकुर, 3 हजार अनुसूचित जाति, 2 हजार पंडित और अन्य ब...









