Wednesday, February 25

40 साल बाद इंसाफ! डॉक्टर पर चिल्लाने के कारण बर्खास्त टाटा मोटर्स कर्मचारी को हाई कोर्ट ने दिलाया न्याय

रांची (आशुतोष कुमार पांडेय): झारखंड हाई कोर्ट ने टाटा मोटर्स और उसके कर्मचारी के बीच लंबे समय से चली कानूनी लड़ाई में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने श्रम न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें 1984 में डॉक्टर पर चिकित्सा लापरवाही के विरोध में चिल्लाने के कारण बर्खास्त किए गए कर्मचारी की बर्खास्तगी को अवैध घोषित किया गया था।

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न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने कहा कि यदि यह किसी वरिष्ठ कर्मचारी का मामला होता, तो चिकित्सा लापरवाही के लिए डॉक्टरों को दंडित किया जाता और मरीज मुआवजे का हकदार होता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारी का इलाज उसके नियोक्ता के अस्पताल में हुआ था और न हटाए गए टांके के कारण सेप्टिक संक्रमण से उसे तीव्र दर्द हुआ, जो चिकित्सा लापरवाही का मामला था।

मामला क्या था?

यह मामला फरवरी 1983 से शुरू हुआ, जब टाटा मोटर्स (तत्कालीन टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी) में स्थायी मोटर मैकेनिक सी.के. सिंह का टेल्को अस्पताल में ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन के बाद सर्जन ने टांका छोड़ दिया, जिससे सिंह को गंभीर दर्द और संक्रमण हुआ। जब उन्होंने फिर से भर्ती होने की मांग की, तो उन्हें मना कर दिया गया। असहनीय दर्द में सिंह ने डॉक्टर पर चिल्लाना शुरू कर दिया।

इसके कुछ दिन बाद वरिष्ठ सर्जन ने शिकायत दर्ज कराई और मार्च 1983 में आरोपपत्र जारी हुआ। जांच के बाद 16 जून 1984 को सिंह को बर्खास्त कर दिया गया।

लेबर कोर्ट और हाई कोर्ट की सुनवाई

जमशेदपुर इंजीनियरिंग मजदूर पंचायत द्वारा मामला औद्योगिक विवाद के रूप में उठाया गया। 2002 में श्रम न्यायालय ने राहत से इनकार किया, लेकिन 2007 में उच्च न्यायालय ने मामले को श्रमिक के व्यक्तिगत अधिकार के तहत आगे बढ़ाने की अनुमति दी।

आखिरकार श्रम न्यायालय ने बर्खास्तगी को अवैध और अनुचित माना और 40 प्रतिशत बकाया वेतन के साथ बहाली का आदेश दिया। टाटा मोटर्स ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन हाई कोर्ट ने श्रम न्यायालय का निर्णय कानूनी, वैध और उचित बताया।

न्यायालय ने आदेश दिया कि मृतक कर्मचारी के कानूनी वारिस बर्खास्तगी की तारीख से लेकर मुआवजे की तारीख तक के 40 प्रतिशत बकाया वेतन और मुआवजे की तारीख से लेकर मृत्यु या सेवानिवृत्ति तक पूरे वेतन और लाभ के हकदार हैं।

परिवार को मिली न्याय की राहत

सिंह की मृत्यु के बाद उनके परिवार को इस लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला। परिवार ने दशकों से झेलते रहे दर्द और आर्थिक नुकसान से राहत पाई, और यह फैसला अन्य कर्मचारियों के लिए भी मिसाल बन गया।

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