**वैश्विक संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा: दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम*
विश्वभर में ऊर्जा संकट की आशंकाओं के बीच भारत ने अपने संसाधनों और नीतिगत दूरदर्शिता के बल पर स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित रखा है। ऐसे समय में जब कई देशों में ईंधन की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, भारत ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की दिशा में ठोस कदम उठाकर अपनी तैयारी मजबूत कर ली है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने भारत के परिवहन क्षेत्र के मूलभूत ढांचे में बड़ा परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है। पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों, हाइड्रोजन फ्यूल और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की नीति पर तेजी से काम किया गया है। वाहन निर्माण कंपनियों के सहयोग से इन नई तकनीकों को मजबूत आधार देने का प्रयास भी निरंतर जारी है।
देश में सड़क निर्माण से लेकर परिवहन व्यवस्था तक, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन आधारित ईंधन की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से बदलाव किए जा रहे हैं। एक समय ऐसा था जब भारत में पेट्रोल और डीजल के अलावा किसी अन्य तकनीक की कल्पना भी मुश्किल मानी जाती थी, लेकिन दूरदर्शी सोच और नीतिगत निर्णयों ने इस सोच को बदल दिया है।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जहां कई देशों में पेट्रोल और डीजल का भंडार सीमित बताया जा रहा है और गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, वहीं भारत ने समय रहते अपने ऊर्जा प्रबंधन को मजबूत किया है। यही कारण है कि आज देश की ऊर्जा व्यवस्था अपेक्षाकृत सुरक्षित हाथों में दिखाई देती है।
इस दिशा में देश के नेतृत्व, विशेष रूप से प्रधानमंत्री Narendra Modi और उनके मंत्रिमंडल की नीतिगत प्रतिबद्धता और प्रशासनिक टीम के समन्वित प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राष्ट्रहित में ठोस निर्णय लेने का संकल्प और भविष्य की चुनौतियों के प्रति सजग दृष्टिकोण भारत को ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
आज यह स्पष्ट दिखाई देता है कि दूरदर्शी नेतृत्व, तकनीकी नवाचार और मजबूत नीतिगत निर्णयों के कारण भारत वैश्विक ऊर्जा संकट की चुनौती के बीच भी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
