
बांदा/चित्रकूट: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले और चित्रकूट में बच्चों के यौन शोषण के मामले में सिंचाई विभाग के जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने मृत्यु दंड की सजा सुनाई।
यह मामला नवंबर 2020 में सामने आया था, जब सीबीआई ने रामभवन और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेजा। जांच के दौरान बच्चों से आमना-सामना कराते ही उन्होंने आरोपी को पहचान लिया और कहा – “ये अंकल बहुत गंदे हैं।” 34 बच्चों में से 25 की गवाही इस दरिंदे को फांसी के फंदे तक पहुँचाने में निर्णायक साबित हुई।
क्या था मामला
रामभवन, जो बांदा जिले के जवाहर नगर नरैनी कस्बा के निवासी चुन्ना प्रसाद कुशवाहा का पुत्र है, पिछले 10 वर्षों से बच्चों का यौन शोषण कर रहा था।
बच्चों के अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें बेचता था।
इस दौरान 50 से अधिक बच्चों को शिकार बनाया।
गिरफ्तारी के समय उसके चित्रकूट स्थित एसडीएम कॉलोनी के आवास से लगभग 8 लाख रुपये, मोबाइल फोन, लैपटॉप, वेब कैमरा, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।
मामला उजागर होने के बाद आरोपी को निलंबित कर दिया गया था।
सीबीआई की जांच और मेडिकल परीक्षण
सीबीआई ने बच्चों और उनके अभिभावकों को एम्स, दिल्ली के पांच डॉक्टरों की टीम के सामने मेडिकल परीक्षण के लिए पहुँचाया।
इस दौरान दो महिला डॉक्टर और छह स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी बच्चों की सुरक्षा और मेडिकल प्रक्रिया में शामिल रहे।
मेडिकल रिपोर्ट और बच्चों के बयान मामले में निर्णायक साबित हुए।
कोर्ट का निर्णय
विशेष पॉक्सो कोर्ट ने रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को सभी आरोपों में दोषी मानते हुए मृत्यु दंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने इस घिनौने अपराध के खिलाफ सख्त फैसला लिया।
