
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ ने भारत समेत दुनिया भर के व्यापार को प्रभावित किया था। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को खारिज कर दिया और इसे आर्थिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर
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विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से वैश्विक अर्थव्यवस्था को तत्काल राहत मिल सकती है।
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हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे वैश्विक व्यापार का माहौल और अनिश्चित हो सकता है।
नए टैरिफ लागू
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फैसले के कुछ समय बाद ट्रंप ने नए नियमों के तहत 150 दिनों के लिए 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लागू किया।
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यूरोपियन पॉलिसी सेंटर के एनालिस्ट वर्ग फॉकमैन ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ के भविष्य पर हर देश अपना आकलन करेगा, जिससे कारोबार में अनिश्चितता बढ़ सकती है।
टैरिफ कायम रहेंगे
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ING बैंक के इकनॉमिस्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला टैरिफ की प्रकृति को बदलने वाला नहीं है।
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यह केवल ट्रंप द्वारा IEEPA अधिनियम के तहत लगाए गए टैरिफ से संबंधित था। अब तक इससे $175 अरब से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ।
भारत और चीन पर प्रभाव
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ग्लोबल ट्रेड अलर्ट के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ का औसत लगभग आधा होकर 15.4% से 8.3% हो जाएगा।
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भारत और चीन पर ज्यादा टैरिफ लागू होने के कारण यहां नाटकीय बदलाव देखे जा सकते हैं। फिलहाल भारत पर 18% टैरिफ है।
द्विपक्षीय डील पर असर नहीं
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से द्विपक्षीय ट्रेड डील पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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ट्रंप प्रशासन ने पहले ही कहा था कि वह कानूनी उपायों से टैरिफ फिर से लागू कर सकता है।
चीन और यूरोप की रणनीति
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EPC के फोकमैन के अनुसार, चीन ने 2025 में लगभग $1.2 ट्रिलियन का व्यापार अधिशेष दर्ज किया और अमेरिकी टैरिफ के माहौल में खुद को ढाल लिया।
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वहीं, ब्रुगेल के शोधकर्ता निकलास पोइटियर्स ने यूरोपीय संघ-अमेरिका व्यापार समझौते में राजनीतिक सवाल उठाए और संभावित चुनौतियों का संकेत दिया।
