Tuesday, February 17

भारत ने सिंधु जल संधि पर रखा रोक, पाकिस्तान ने यूएन में उठाई नापाक चाल

इस्लामाबाद/नई दिल्ली: भारत द्वारा सिंधु जल समझौते पर रोक लगाने के फैसले के बाद पाकिस्तान ने तिलमिलाहट दिखाते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में लेकर जाने की कोशिश की है। भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद संधि पर अस्थायी रोक लगा दी थी। यह फैसला इतना संवेदनशील था कि तीन युद्धों के बाद भी भारत ने कभी इसे स्थगित नहीं किया था।

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पाकिस्तान की नापाक चाल
31 दिसंबर को पाकिस्तान ने UNSC की बैठक में कहा कि अगर प्राकृतिक संसाधनों को साझा करने वाली संधि को एकतरफा तरीके से स्थगित किया जा सकता है, तो कोई भी अंतरराष्ट्रीय समझौता सुरक्षित नहीं है। इसके जरिए पाकिस्तान भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि इस विवाद में कोई तीसरा पक्ष मध्यस्थ नहीं होगा और मामला पूरी तरह द्विपक्षीय ही है।

भारत का रुख मजबूत
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का फैसला संधि को रोकने के बजाय इसके असली संतुलन को बहाल करने की कोशिश है। भारत ने हाइड्रोलॉजिकल डेटा शेयरिंग और मध्यस्थता प्रक्रिया को अस्थायी रूप से सस्पेंड किया है, लेकिन कोई समझौता रद्द नहीं हुआ। पाकिस्तान का आरोप झूठ पर आधारित है और वह विवाद को वैश्विक स्तर पर बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहा है।

विश्लेषकों की राय:
उत्तम कुमार सिन्हा के अनुसार, पाकिस्तान संधि को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरे के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि असल मुद्दा यह है कि संधि का सही इस्तेमाल कैसे किया जाए। भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि सीमा पार आतंकवाद और मिलिट्री उकसावे के बावजूद समझौते का पालन किया जाएगा, लेकिन गलत इस्तेमाल को कोई मौका नहीं दिया जाएगा।

निष्कर्ष:
भारत ने सिंधु जल संधि पर अपनी स्थिति दृढ़ और संकल्पित रखी है। पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बयानबाजी के बावजूद, भारत के रुख से स्पष्ट होता है कि वह सुधार और संतुलन के पक्ष में है, न कि दबाव में आने वाला।

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