
टोक्यो/बीजिंग: जापान और चीन के रिश्ते पिछले सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए हैं। हालिया तनाव की शुरुआत पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री साने ताकाइची के एक बयान से हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा कि ताइवान पर चीन का हमला जापान के अस्तित्व के लिए खतरा है। इस बयान पर चीन नाराज हो गया और बीजिंग ने टोक्यो पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया।
चीन की ताइवान पर नाराजगी
चीन ताइवान को अपनी संप्रभुता का हिस्सा मानता है और किसी भी बाहरी दखल पर कड़ी प्रतिक्रिया करता है। ताकाइची के बयान ने बीजिंग की नाराजगी को और बढ़ा दिया। हाल ही में म्यूनिक सुरक्षा सम्मेलन में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने जापान में सैन्यवाद लौटने की चेतावनी दी और कहा कि जापान अगर फिर से “खेल” खेलेगा तो उसे तेज हार का सामना करना पड़ेगा।
जापान ने झुकने से इनकार किया
चीन की चेतावनियों के बावजूद ताकाइची ने अपने बयान को वापस लेने या माफी मांगने से साफ इनकार किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने अब जापान पर आर्थिक और व्यापारिक दबाव बढ़ा दिया है।
चीन ने जापान पर आर्थिक दबाव बढ़ाया
बीजिंग ने जापान को रेयर अर्थ एलीमेंट्स और महत्वपूर्ण मिनरल्स की आपूर्ति पर रोक लगाई है। इसके अलावा, चीन ने जापान जाने वाले पर्यटकों और छात्रों पर चेतावनी जारी की है और 49 फ्लाइट रूट्स रद्द कर दिए हैं। जापानी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री और फिल्म रिलीज पर भी चीन ने रोक लगा दी है।
चीन की सतर्कता
विशेषज्ञ रॉबर्ट वार्ड का कहना है कि चीन जापान पर बहुत अधिक सख्ती नहीं कर रहा है क्योंकि वह खुद को जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में पेश करना चाहता है और अमेरिका के मुकाबले विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका सुरक्षित रखना चाहता है।
जापान के विकल्प
प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने हाल के चुनावों में ऐतिहासिक रूप से मजबूत जनादेश हासिल किया है। यह उन्हें डिफेंस और आर्थिक नीतियों को मजबूत करने का अवसर देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ताकाइची चीन के दबाव के बावजूद अपने रुख पर मजबूती से खड़े रहने की संभावना रखती हैं।
