Friday, February 13

रेलवे ट्रैक पर 20 पत्थर रखकर यात्रियों की जान खतरे में डालने वाला ‘साधु’ दोषी, कोर्ट ने सुनाई 2 साल की सजा

हैदराबाद: रेलवे पटरियों पर जानबूझकर पत्थर रखकर यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने के मामले में रेलवे कोर्ट ने हरिद्वार निवासी 42 वर्षीय व्यक्ति रामदास को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई है। आरोपी पर आरोप था कि उसने काचीगुडा-बुडवेल रेलवे रूट पर कई स्थानों पर ट्रैक के जंक्शन पॉइंट्स के पास पत्थर रखकर संभावित बड़े हादसे की साजिश रची।

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साउथ सेंट्रल रेलवे (SCR) के अधिकारियों ने बताया कि यदि समय रहते ट्रैक पर रखे पत्थर नहीं हटाए जाते, तो इससे किसी भी ट्रेन के पटरी से उतरने जैसी गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।

रेलवे एक्ट की कई धाराओं में दोषी

कोर्ट ने आरोपी रामदास को रेलवे एक्ट की धारा 153, 174C और 147 के तहत दोषी माना। ये धाराएं यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालने, रेलवे परिसर में अवैध प्रवेश और रेलवे कार्य में बाधा डालने जैसे अपराधों से संबंधित हैं।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह की हरकतें न केवल मानव जीवन के लिए खतरा हैं, बल्कि रेलवे संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे अपराधों पर सख्ती से कार्रवाई जरूरी है।

आरपीएफ ने सीसीटीवी फुटेज से पकड़ा आरोपी

यह मामला 8 मई 2025 को सामने आया था, जब एक ट्रैकमैन ने काचीगुडा और बुडवेल स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक पर संदिग्ध पत्थर और इलास्टिक रेल क्लिप देखे। सूचना मिलते ही आरपीएफ ने विशेष टीम बनाकर जांच शुरू की।

सीसीटीवी फुटेज में आरोपी रामदास को जंक्शन पॉइंट्स के पास संदिग्ध रूप से घूमते हुए देखा गया। सबूतों के आधार पर आरपीएफ ने उसे ट्रैक कर गिरफ्तार कर लिया।

पांच जगहों पर रखे थे 20 पत्थर

आरपीएफ के अनुसार आरोपी ने काचीगुडा-बुडवेल सेक्शन में पांच अलग-अलग स्थानों पर एक लाइन में कुल 20 पत्थर रखे थे। पूछताछ के दौरान उसने अपने मकसद पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

तमिलनाडु में भी कर चुका था ऐसी हरकत

जांच में यह भी सामने आया कि रामदास कोविड महामारी के दौरान नौकरी छूटने के बाद खुद को साधु बताने लगा था और अलग-अलग राज्यों में घूमकर इस तरह की घटनाओं को अंजाम देता रहा। आरपीएफ ने बताया कि आरोपी ने तमिलनाडु में भी इसी प्रकार के अपराध किए थे।

रेलवे सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह सजा साउथ सेंट्रल रेलवे क्षेत्र में ट्रैक बाधा से जुड़े मामलों में अब तक की सबसे बड़ी जेल सजा मानी जा रही है, क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में तीन महीने तक की सजा ही दी जाती थी।

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