
भोपाल: कुटुंब न्यायालय में हाल ही में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने 90 के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म जुदाई की यादें ताजा कर दीं। भोपाल की एक महिला ने अपने पति को उसकी पत्नी से डेढ़ करोड़ रुपये देकर हमेशा के लिए अपने नाम करा लिया। यह मामला परिवारिक शांति और व्यावहारिक समझौते का अनोखा उदाहरण बन गया है।
सरकारी विभाग में कार्यरत हैं अधिकारी
मामला केंद्रीय सरकारी विभाग से जुड़ा है। 42 वर्षीय अधिकारी का प्रेम प्रसंग अपनी ही सहकर्मी के साथ शुरू हुआ। प्रेमिका की उम्र 54 वर्ष है, यानी वह अधिकारी से 12 साल बड़ी हैं। जैसे-जैसे उनका रिश्ता बढ़ा, अधिकारी ने अपने घर, पत्नी और दो मासूम बेटियों की अनदेखी शुरू कर दी। घर में लगातार तनाव और विवादों का माहौल बन गया।
बेटियों पर पड़ रहा था असर
इस दंपति की दो बेटियां, 16 और 12 वर्ष की, इस तनाव से मानसिक अवसाद का शिकार हो रही थीं। बड़ी बेटी ने हिम्मत दिखाई और मामले को कुटुंब न्यायालय तक ले गई। काउंसलिंग के दौरान पति ने स्पष्ट कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ खुश नहीं है और उसे मानसिक शांति केवल प्रेमिका के साथ मिलती है।
व्यावहारिक समझौता हुआ
महिला ने अपने बच्चों के भविष्य और जीवनयापन की सुरक्षा के लिए एक डुप्लेक्स मकान और 27 लाख रुपये नकद की मांग रखी। प्रेमिका ने बिना किसी हिचकिचाहट के यह शर्त मान ली। उनका कहना था कि वह अपने साथी के परिवार को बेसहारा नहीं देखना चाहती और इसके लिए अपनी जीवन भर की बचत देने को तैयार हैं।
विशेषज्ञों की राय
परिवारिक मामलों के काउंसलर्स का मानना है कि जब भावनाएं खत्म हो जाएं, तो जबरन साथ रहने से बेहतर है सम्मानजनक और सुरक्षित अलगाव। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और परिवार की वित्तीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह निर्णय तार्किक और व्यावहारिक माना जा सकता है।
