Wednesday, February 11

6 छंद, 25 लाइनें, 3.10 मिनट — वंदे मातरम् के लिए अब राष्ट्रगान जैसा आधिकारिक प्रोटोकॉल

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के गायन के लिए विस्तृत और आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी किया है। नए दिशानिर्देशों में बताया गया है कि सरकारी और सार्वजनिक समारोहों में इसे कब, कैसे और किस क्रम में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। साथ ही, इस दौरान दर्शकों का आचरण कैसा होना चाहिए, इसकी भी स्पष्ट रूपरेखा दी गई है।

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गृह मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों का मुख्य उद्देश्य देशभर में वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के समान औपचारिक सम्मान दिलाना और राजकीय तथा संस्थागत कार्यक्रमों में इसकी प्रामाणिक भूमिका सुनिश्चित करना है। इसके अनुसार, छह छंदों वाला संपूर्ण आधिकारिक संस्करण, जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है, प्रमुख समारोहों में बजाया या प्रस्तुत किया जाएगा। इनमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रपति और राज्यपाल के औपचारिक आगमन एवं प्रस्थान, और उनके निर्धारित भाषणों से पहले या बाद में कार्यक्रम शामिल हैं।

वंदे मातरम् के छंद:

सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
सस्य श्यामलां मातरम्।
वंदे मातरम्॥

शुभ्र ज्योत्सनाम् पुलकित यामिनीम्
फुल्ल कुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्।
सुखदां वरदां मातरम्॥

कोटि कोटि कन्ठ कलकल निनाद कराले
द्विसप्त कोटि भुजैर्ध्रत खरकरवाले
के बोले मा तुमी अबले
बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम्
रिपुदलवारिणीम् मातरम्॥

तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि ह्रदि तुमि मर्म
त्वं हि प्राणाः शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे॥

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदल विहारिणी
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्
नमामि कमलां अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलां मातरम्॥

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्
धरणीं भरणीं मातरम्॥

नए प्रोटोकॉल की मुख्य बातें:

  • यदि किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान दोनों हों, तो वंदे मातरम् पहले और राष्ट्रगान बाद में होगा।

  • दर्शकों से अपेक्षा की जाती है कि दोनों प्रदर्शनों के दौरान वे सावधान मुद्रा में खड़े रहेंगे।

  • शिक्षण संस्थानों से दैनिक स्कूल सभाओं और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में वंदे मातरम् को गाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, ताकि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ सके।

  • बैंड या लाइव प्रदर्शन के दौरान गायन की औपचारिक शुरुआत ढोल की थाप या बिगुल की ध्वनि से की जाएगी।

सिनेमा हॉल के लिए छूट:
फिल्मों के साउंडट्रैक के हिस्से के रूप में वंदे मातरम् बजाने पर दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी। यह कदम मनोरंजन अनुभव को बाधित होने और भ्रम उत्पन्न होने से रोकने के लिए उठाया गया है।

इस प्रोटोकॉल से लंबे समय से जारी वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के औपचारिक नियमों में अंतर और असंगति को दूर करने का प्रयास किया गया है।

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