
नई दिल्ली। चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का सम्मान करते हुए वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में अपनी सोच में बड़ा बदलाव दिखाया है। यह कदम पिछले चार साल में भारत और चीन के रिश्तों में आए सकारात्मक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओक्सू ने 10 फरवरी को दिल्ली में भारत-चीन रणनीतिक संवाद के दौरान स्पष्ट किया कि चीन भारत की UNSC सदस्यता की आकांक्षा को समझता और उसका सम्मान करता है। यह बयान उस समय आया जब भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा था।
पहले चीन का रुख था विरोधी
याद रहे, 2022 में भारत ने सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए आवेदन किया था। उस समय चीन ने इसका समर्थन नहीं किया था, जबकि अन्य चार स्थायी सदस्य – अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस – भारत के पक्ष में थे।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना
यूएनएससी में कुल 15 सदस्य होते हैं – 5 स्थायी और 10 अस्थायी। स्थायी सदस्यों के पास वीटो का अधिकार होता है, जिससे उनके समर्थन के बिना कोई प्रस्ताव पास नहीं हो सकता। भारत की दावेदारी को लेकर ब्राजील, जर्मनी, जापान और दक्षिण अफ्रीका भी प्रतिस्पर्धी देशों में शामिल हैं।
भारत-चीन संबंधों में 2020 के बाद सुधार
2020 में गलवान घाटी में हिंसक संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंध निचले स्तर पर चले गए थे। इसके बाद सीमा पर सैनिक स्तर पर सुधार की पहल और शीर्ष नेतृत्व के द्विपक्षीय संपर्क से संबंधों में सकारात्मक बदलाव आया। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शंघाई सहयोग संगठन (SCO) यात्रा और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय चर्चा ने भी रिश्तों में मजबूती दी।
ब्रिक्स और रणनीतिक संवाद से मिली नई दिशा
10 फरवरी, 2026 को दिल्ली में हुए रणनीतिक संवाद में दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति, स्थिरता और द्विपक्षीय सहयोग पर जोर दिया। इसके अलावा पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और वीजा प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने की पहल ने भी भारत-चीन संबंधों में विश्वास और मजबूती बढ़ाई।
विश्लेषक मानते हैं कि चीन का यह रुख भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और नेतृत्व की मान्यता के लिए एक सकारात्मक संकेत है और आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
