
भोपाल। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। लाखों युवा हर साल इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश की सिमाला प्रसाद की कहानी बेहद प्रेरणादायक है।
सिमाला प्रसाद न सिर्फ मेहनती आईपीएस ऑफिसर हैं, जिन्हें लोग प्यार से “लेडी सिंघम” कहते हैं, बल्कि एक प्रतिभाशाली एक्ट्रेस भी हैं। मध्य प्रदेश के डिंडौरी में नक्सल प्रभावित इलाके में अपनी डटकर सेवा देने की वजह से उनका नाम अपराधियों में खौफ पैदा करने वाला बन गया।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा
सिमाला का जन्म 8 अक्टूबर 1980 को भोपाल में हुआ। उनके पिता डॉ. भागीरथ प्रसाद पूर्व IAS ऑफिसर और सांसद रह चुके हैं। माता मेहरुन्निसा परवेज हिंदी लेखिका हैं और उन्हें 2005 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
सिमाला ने बचपन से पढ़ाई और एक्टिंग दोनों में रुचि दिखाई। बार-बार स्कूल बदलने के बावजूद उन्होंने कॉमर्स में ग्रेजुएशन और बाद में बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी से सोशियोलॉजी में मास्टर डिग्री हासिल की।
पहले DSP, फिर IPS
कॉलेज के बाद सिमाला ने मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस परीक्षा पास करके DSP बनीं। इसके बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और 2010 में पहले प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल करके आईपीएस बनीं। उन्होंने सेल्फ-स्टडी से यह मुकाम हासिल किया।
असली अपराधियों में खौफ
सिमाला प्रसाद को “लेडी सिंघम” का नाम इसलिए मिला क्योंकि डिंडौरी में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाके में अपनी धमक बना दी। उनके काम और साहस के कारण अपराधियों में डर फैल गया।
बॉलीवुड में करियर
सिमाला प्रसाद ने एक्टिंग का शौक भी जीवित रखा। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान डायरेक्टर जैगम इमाम ने उन्हें देखा और फिल्म ‘अलीफ’ (2017) में कास्ट किया। इसके बाद ‘नक्काशा’ (2019) में जर्नलिस्ट का रोल निभाया।
लापता लड़कियों पर किताब
अपने 15 साल से अधिक पुलिसिंग और फील्ड इन्वेस्टिगेशन के अनुभव को साझा करते हुए सिमाला ने किताब ‘She Goes Missing’ लिखी। यह किताब भारत में लापता लड़कियों के मामलों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है और हर केस की असली कहानी को पाठकों तक पहुंचाती है।
सिमाला प्रसाद की यह कहानी दिखाती है कि कड़ी मेहनत, साहस और समर्पण के जरिए इंस्पेक्टर और एक्ट्रेस दोनों बनने का सपना सच किया जा सकता है।