Tuesday, February 3

‘ऑस्ट्रेलिया जाना जाल में फंसने जैसा’, भारतीय वर्कर ने खोला वर्क-लाइफ बैलेंस और सेफ्टी का राज़

सिडनी। विदेश में नौकरी करने का सपना हर साल हजारों भारतीय देखते हैं, लेकिन वास्तविकता हमेशा उम्मीदों जैसी नहीं होती। ऐसा ही अनुभव साझा किया है आकांक्षा नाम की एक भारतीय महिला वर्कर ने, जो ऑस्ट्रेलिया में काम कर रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि ऑस्ट्रेलिया आकर उन्हें असली वर्क-लाइफ बैलेंस और सुरक्षा का अनुभव हुआ, जो उन्हें एक ‘जाल’ में फंसा हुआ महसूस कराता है।

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छह महीने में फंसी जाल में:
आकांक्षा ने वीडियो में मजाकिया अंदाज में कहा, “कोई आपको नहीं बताएगा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया जाना एक जाल है। मैंने सोचा था कि मैं यहां आकर अच्छी सैलरी वाली नौकरी पाऊंगी और आराम से जिंदगी बिताऊंगी, लेकिन छह महीने के भीतर ही मुझे इस जाल का एहसास हो गया।”

भारत की लग्जरी, ऑस्ट्रेलिया में सामान्य:
उन्होंने बताया कि अब उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। सुबह 6 बजे उठना, जिम जाना और 10 किलोमीटर पैदल चलना उनके रोज़मर्रा का हिस्सा बन गया है। भारत में जो चीजें लग्जरी लगती थीं, जैसे शांति, आराम, आर्थिक स्थिरता और सुरक्षित माहौल, ऑस्ट्रेलिया में ये सभी सामान्य हैं।

ऑस्ट्रेलिया ने दिया क्या-क्या:
आकांक्षा ने आगे कहा, “यहां मुझे असली वर्क-लाइफ बैलेंस मिला है। साफ हवा, सुरक्षित शहर, सचमुच वीकेंड जैसा वीकेंड और घूमने-फिरने की ऊर्जा भी। रात में बिना डर के घूमना, अच्छा खाना, पैदल चलना और आराम से जीवन जीना—सब कुछ यहां उपलब्ध है। यहां की जिंदगी की आदत हो गई है, और मुझे नहीं लगता कि मैं वापस जा पाऊंगी।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया में काम करते समय कोई तनाव नहीं होता, बीमारी की छुट्टी के लिए बहाना नहीं बनाना पड़ता और वीकेंड में काम करना कोई अपराध नहीं है। “बस सुकून, प्रकृति और बेहतरीन जीवन—यह सब सच में एक जाल जैसा है,” उन्होंने कहा।

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