Thursday, January 15

एम्स भोपाल और IIT इंदौर ने विकसित की एआई-बेस्ड पोर्टेबल 3D एक्स-रे यूनिट, ‘गोल्डन आवर’ में बचाएगी मरीजों की जान

 

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भोपाल: भारत में सड़क हादसों और ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर इलाज न मिलना हर साल हजारों लोगों की जान ले लेता है। विशेषकर सीटी स्कैन जैसी जांचों के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता के कारण मरीज अक्सर ‘गोल्डन आवर’ में दम तोड़ देते हैं। इस गंभीर चुनौती का समाधान करने के लिए AIIMS भोपाल और IIT इंदौर ने मिलकर दुनिया की पहली एआई-बेस्ड पोर्टेबल 3D एक्स-रे यूनिट विकसित करने का काम शुरू किया है।

 

यह क्रांतिकारी तकनीक मरीजों को अस्पताल पहुंचने से पहले ही सीटी स्कैन जैसी हाई-डेफिनेशन रिपोर्ट उपलब्ध कराएगी। इसके माध्यम से डॉक्टर मौके पर ही चोट की गंभीरता का मूल्यांकन कर सकेंगे, जिससे आपातकालीन समय में उपचार तुरंत शुरू किया जा सकेगा।

 

ICMR ने दी 8 करोड़ की फंडिंग

इस प्रोजेक्ट को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने मंजूरी दी है। देशभर से आए 1,224 रिसर्च प्रस्तावों में से केवल 38 को चुना गया, जिनमें मध्य प्रदेश से यह अकेला प्रोजेक्ट है। ICMR ने इसके विकास के लिए 8 करोड़ रुपये की फंडिंग भी स्वीकृत की है।

 

तकनीक कैसे काम करेगी?

 

पोर्टेबल यूनिट: यह मशीन पूरी तरह पोर्टेबल होगी और एंबुलेंस में आसानी से इस्तेमाल की जा सकेगी।

कम रेडिएशन: यह सामान्य सीटी स्कैन की तुलना में 500 गुना कम रेडिएशन उत्सर्जित करेगी।

AI आधारित 3D इमेजिंग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक्स-रे इमेज को मल्टी-एंगल से कैप्चर कर 3D इमेज में बदला जाएगा।

तत्काल रिपोर्ट: जांच रिपोर्ट सीधे मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर देखी जा सकेगी।

 

तीन चरणों में होगा विकास:

प्रोजेक्ट के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. बी.एल. सोनी और डॉ. अंशुल राय के अनुसार, यूनिट का विकास तीन चरणों में होगा:

 

  1. सिर और चेहरे की इमेजिंग
  2. फुल-बॉडी स्कैनिंग
  3. कैंसर रेडिएशन मैपिंग

 

कितनी जानें बच सकती हैं:

मध्य प्रदेश में हर साल लगभग डेढ़ लाख लोग सड़क हादसों का शिकार होते हैं। इस पोर्टेबल यूनिट के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को बिना रेफर किए तत्काल सटीक इलाज मिल सकेगा। सफल परीक्षण के बाद इसे व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारने की योजना है, जिससे दुनिया भर में आपातकालीन चिकित्सा को सस्ता और सुलभ बनाया जा सके।

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