
नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 से ठीक एक महीने पहले ही बांग्लादेश और भारत के बीच नया विवाद शुरू हो गया है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने कहा है कि वे भारत में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं और अपने मैच श्रीलंका में कराने की मांग कर रहे हैं। ICC से यह मांग करने के बाद भी अब तक कोई औपचारिक निर्णय नहीं आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ICC चेयरमैन जय शाह ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं। लेकिन इस मसले में कई हितधारक जुड़े हैं और इसे हल करना इतना आसान नहीं है।
यहाँ इस मुद्दे को 5 पॉइंट्स में समझें—
- ICC की तरफ से कोई औपचारिक बयान नहीं:
इस विवाद के कई दिन बीत जाने के बावजूद ICC ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। केवल मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ICC ने बांग्लादेश की मांग पर विचार करना शुरू किया है। अगले दो दिनों में ICC अधिकारी BCCI और BCB के साथ बैठक कर सकते हैं, जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। - BCCI के पास रोकने का अधिकार:
चूंकि यह ICC इवेंट है और BCCI सह-मेजबान है, इसलिए उन्हें इस मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार है। शेड्यूल में बदलाव से सभी टीमों, दर्शकों और लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ेगा। BCCI का कहना है कि मैच हटाने का सवाल ही नहीं उठता। - भारत सरकार की भूमिका अहम:
BCB ने अपनी कार्रवाई अपनी सरकार के निर्देश पर की है। ऐसे में विदेश नीति और द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ सकता है। BCCI को इस मसले में सरकार से परामर्श लेना पड़ सकता है। हालांकि अभी तक सरकार का रुख स्पष्ट नहीं है। - ICC बांग्लादेश पर कार्रवाई कर सकती है:
ऐतिहासिक रूप से, वर्ल्ड कप में मैच छोड़ने या शेड्यूल बदलने की धमकी देने पर ICC ने कई बार कार्रवाई की है। उदाहरण के लिए, 1996 वर्ल्ड कप में श्रीलंका जाने से इंकार करने पर अंक कट गए थे। लेकिन बांग्लादेश ने हाल ही में भारत के मैच यूएई में कराने का उदाहरण दिया है, जिससे कार्रवाई करना थोड़ा मुश्किल होगा। - अन्य टीमों की आपत्ति:
बांग्लादेश को इस वर्ल्ड कप में कोलकाता और मुंबई में 4 ग्रुप मैच खेलने हैं। यदि इन मैचों को रिशेड्यूल किया जाता है, तो अन्य टीमों को लंबी हवाई यात्रा करनी पड़ेगी। शेड्यूल के कड़े समय को देखते हुए यह टी20 वर्ल्ड कप के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
निष्कर्ष:
अभी स्थिति जटिल बनी हुई है। BCCI का रुख साफ है, ICC की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी बाकी है और भारत सरकार की भूमिका निर्णायक हो सकती है। ऐसे में बांग्लादेश की मांग को पूरी तरह मानना या खारिज करना अगले कुछ दिनों में स्पष्ट होगा।