Monday, April 6

SPICE-1000 बनाम ‘गौरव’: जब स्वदेशी विकल्प मौजूद है, तो इजरायल से महंगा ग्लाइड बम क्यों खरीद रहा भारत?

 

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भारत की रक्षा तैयारियों को नई धार देने के लिए डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने भारतीय वायुसेना के लिए इजरायल के SPICE-1000 लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन गाइडेंस किट की खरीद को मंजूरी दे दी है। सरकारी बयान में कहा गया है कि यह प्रणाली वायुसेना की लंबी दूरी से सटीक प्रहार क्षमता को और मजबूत करेगी।

 

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब DRDO का पूरी तरह स्वदेशी ‘गौरव’ लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम अंतिम परीक्षण चरण में है और जल्द ही सेवा में शामिल होने की संभावना है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब स्वदेशी विकल्प मौजूद है, तो भारत इजरायल से काफी महंगा SPICE-1000 क्यों खरीद रहा है?

 

SPICE-1000: सिर्फ बम नहीं, स्मार्ट हथियार

 

SPICE-1000 कोई साधारण बम नहीं, बल्कि एक अत्याधुनिक स्मार्ट गाइडेंस किट है, जो 1,000 पाउंड के पारंपरिक बम को घातक प्रिसिजन गाइडेड हथियार में बदल देती है। इसमें फोल्डिंग विंग्स, सैटेलाइट नेविगेशन और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) सीकर लगा होता है।

 

इसकी सबसे बड़ी ताकत है ऑटोमैटिक टारगेट एक्विजिशन (ATA) तकनीक। यानी यदि बम दागने के बाद टारगेट बदल दिया जाए, GPS जैम कर दिया जाए या शुरुआती लॉक में गलती हो, तब भी यह बम अपने वास्तविक लक्ष्य को पहचानकर सटीक हमला करता है।

 

बालाकोट जैसी सर्जिकल स्ट्राइक में साबित हुआ असर

 

सैन्य विश्लेषक और भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट विजयेन्द्र के ठाकुर के मुताबिक, युद्ध के दौरान GPS जैमिंग आम बात है, लेकिन SPICE सिस्टम ऐसे हालात में भी प्रभावी रहता है। यही कारण है कि बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसे हाई-वैल्यू मिशन में वायुसेना ने SPICE-2000 और SPICE-250 का इस्तेमाल किया था।

 

SPICE-1000 की मारक दूरी करीब 125 किलोमीटर है और इसकी सटीकता तीन मीटर से कम CEP बताई जाती है, जो इसे बेहद घातक हथियार बनाती है।

 

‘गौरव’: स्वदेशी ताकत, लेकिन कुछ सीमाएं

 

DRDO के रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद द्वारा विकसित ‘गौरव’ लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम पूरी तरह स्वदेशी है। यह 1,000 किलोग्राम के हाई-स्पीड लो-ड्रैग (HSLD) बम के साथ इस्तेमाल होता है और INS व SATNAV आधारित गाइडेंस से लैस है।

 

हाल ही में Su-30MKI लड़ाकू विमान से इसके सफल परीक्षण किए गए हैं। इसकी मारक दूरी 30 से 150 किलोमीटर के बीच है और लागत के लिहाज से यह SPICE-1000 से कहीं सस्ता है। इसमें सेमी-एक्टिव लेजर होमिंग (SALH) सीकर लगाने का विकल्प भी मौजूद है।

 

रणनीतिक अंतर: यहीं तय होता है फैसला

 

विशेषज्ञों के अनुसार, गौरव की सबसे बड़ी कमी है इसमें EO/IR सीकर का अभाव। लॉन्च के बाद यह बम सीधे टारगेट की ओर ग्लाइड करता है और SPICE-1000 की तरह उड़ान के दौरान टारगेट बदलने या अप्रोच डायरेक्शन चुनने की क्षमता नहीं रखता।

 

वहीं SPICE-1000 में ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ के साथ-साथ ‘फायर-एंड-अपडेट’ क्षमता है। पायलट या वेपन सिस्टम ऑफिसर उड़ान के दौरान सीकर की लाइव इमेज देखकर लक्ष्य बदल सकता है। GPS जैमिंग और खराब मौसम का भी इस पर सीमित असर पड़ता है।

 

क्यों महंगा, फिर भी जरूरी?

 

रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि हाई-वैल्यू और संवेदनशील मिशनों के लिए फिलहाल SPICE-1000 ज्यादा भरोसेमंद विकल्प है। वहीं ‘गौरव’ भविष्य में बड़ी संख्या में तैनाती और लागत प्रभावी हमलों के लिए अहम भूमिका निभा सकता है।

 

यानी रणनीति साफ है—

तुरंत जरूरत और अत्यधिक सटीकता के लिए SPICE-1000,

और दीर्घकाल में आत्मनिर्भरता के लिए ‘गौरव’।

 

 

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