Thursday, May 14

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11 महीने का मासूम, बेबस मां-बाप और 10 फीट गहरा पानी… भीड़ देखती रही, एक महिला बन गई ‘देवी’

डूंगरपुर। राजस्थान के डूंगरपुर में बुधवार की सुबह एक ऐसा हादसा हुआ जिसने लोगों को भीतर तक झकझोर दिया—और साथ ही एक महिला के असाधारण साहस ने पूरे प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। बांसवाड़ा–डूंगरपुर हाईवे पर 10 फीट गहरे पानी में एक कार डूब गई, जिसमें एक दंपती और उनका 11 महीने का बेटा फंस गए। चारों ओर खड़ी भीड़ मोबाइल से वीडियो बनाने में लगी थी, तभी 35 वर्षीय सुरता देवी ने बिना एक पल गंवाए पानी में छलांग लगा दी और तीन जिंदगियों को मौत के मुंह से बाहर खींच लाईं।

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आज पूरा डूंगरपुर उन्हें ‘देवी’ कहकर सलाम कर रहा है।

धमाके जैसी आवाज, बाहर दौड़ी सुरता और देखी डूबती कार

हादसा सुबह लगभग 10 बजे का था। सरकारी स्कूल के ग्रेड सेकेंड टीचर धर्मेश यादव, पत्नी शिल्पा और 11 महीने के बेटे के साथ शादी समारोह में जा रहे थे। हीरोता गांव के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर सीधे सड़क के किनारे बने बड़े पानी के गड्ढे में गिर गई।

इसी दौरान सुरता ने “धप्प” जैसी तेज आवाज सुनी। बाहर निकलीं तो देखा—कार पानी में डूब रही थी। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के पानी में छलांग लगा दी।

कांच तोड़ने में घायल हुए हाथ, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी

कार लगभग पूरी तरह पानी में डूब चुकी थी। सुरता ने कांच तोड़ने की कोशिश की। तभी उनकी बेटी आयुषी और पास का एक युवक भी मदद के लिए उतर आया। युवक ने किसी तरह कांच तोड़ा, लेकिन उसके हाथ में गहरी चोट लग गई।

फिर एक और शीशा तोड़ा गया। पानी में भीतर झांकते ही सुरता को एक मासूम बच्चा तैरता दिखाई दिया।

पहले बचाया मासूम, फिर बाहर निकाले मां-बाप

सुरता ने सबसे पहले बच्चे को पकड़कर बाहर खींचा। इसके बाद पुरुष को निकाला गया, जो बेहोश था। महिला पानी में फंसी हुई थी। सुरता ने उसके सिर को पकड़कर जोर लगाया और किसी तरह उसे भी बाहर निकाल लिया।

तीनों को किनारे लाकर सांसें चलाने की कोशिश की गई।

भीड़ वीडियो बनाती रही, एक युवक ने निभाई जिम्मेदारी

हादसे की जगह पर भीड़ तो खूब जुट गई, लेकिन मदद के लिए आगे केवल एक युवक ही बढ़ा जो सुरता के साथ उतरकर कांच तोड़ने में जुटा रहा। यह दृश्य एकबारगी फिर यह सवाल छोड़ गया—
क्या हम हादसों में मददगार बन रहे हैं या सिर्फ दर्शक?

तीनों को अस्पताल ले जाया गया, दंपती उदयपुर रेफर

बच्चे की हालत खतरे से बाहर बताई गई है। जबकि धर्मेश और शिल्पा के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें थीं, जिसके चलते दोनों को उदयपुर रेफर किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

“कोई हादसा देखें तो तुरंत मदद करें”—सुरता देवी

तीन जिंदगियां बचाने वाली सुरता देवी ने बेहद सरल शब्दों में कहा—
“अगर कोई हादसा दिखे तो मदद करनी चाहिए। भगवान ने हिम्मत दी, इसलिए मैं दौड़ पड़ी।”

आज पूरा क्षेत्र कह रहा है—
अगर सुरता वहां नहीं होतीं, तो शायद यह परिवार जिंदा नहीं होता।

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