
पिण्डवाड़ा (भूपेन्द्र परमार)। जैन समाज के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का अवसर है कि लगभग 35 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पूज्य जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी म.सा. चातुर्मास हेतु अपनी जन्मभूमि पिण्डवाड़ा में मंगल पदार्पण करने जा रहे हैं। उनके आगमन को लेकर सकल जैन संघ एवं श्रद्धालुओं में अपार उत्साह और उल्लास का वातावरण है।

उल्लेखनीय है कि आज से लगभग 35 वर्ष पूर्व आचार्य श्री ने अपने मुनि जीवन के दौरान पिण्डवाड़ा में अविस्मरणीय चातुर्मास किया था। इसके पश्चात उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु सहित देश के विभिन्न राज्यों में व्यापक पदविहार कर जैन धर्म, अहिंसा, संयम एवं आध्यात्मिक मूल्यों का प्रभावी प्रचार-प्रसार किया।
वर्तमान में आचार्य श्री के संयम जीवन स्वीकार का स्वर्णिम वर्ष चल रहा है। संयम जीवन अपनाने के बाद यह उनका 50वाँ चातुर्मास है, जिससे इस वर्ष का चातुर्मास और भी ऐतिहासिक एवं विशेष बन गया है।
चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश रविवार, 19 जुलाई को प्रातः 8:30 बजे होगा। इस अवसर पर नगर पालिका परिसर से भव्य शोभायात्रा प्रारंभ होगी, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए प्रेम सूरी गुरु मंदिर पहुँचेगी। वहाँ विशाल धर्मसभा का आयोजन किया जाएगा।
धर्मसभा में पूज्य जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी म.सा. श्रद्धालुओं को अपने प्रेरणादायी उद्बोधन से धर्म, संयम एवं सदाचार का संदेश देंगे। इसी पावन अवसर पर उनके द्वारा हिंदी भाषा में लिखित 276वीं पुस्तक “चिंतन की चांदनी” का भव्य विमोचन भी किया जाएगा।
इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में मुंबई, सूरत सहित देश के विभिन्न शहरों में निवासरत पिण्डवाड़ा के प्रवासी श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग लेने पहुँच रहे हैं। वहीं गोडवाड़ क्षेत्र के अनेक नगरों एवं गाँवों से भी हजारों गुरु भक्तों के आगमन की संभावना है।
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बाली, फालना, सेवाड़ी, रानी स्टेशन एवं कांकरोली से पिण्डवाड़ा तक विशेष बसों की व्यवस्था भी की गई है, जिससे अधिक से अधिक श्रद्धालु इस ऐतिहासिक एवं पुण्य अवसर के साक्षी बन सकें।


