Monday, June 15

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एंटी करप्शन संगठनों के नाम पर बढ़ रही ठगी और दबंगई, फर्जी संस्थाओं पर कार्रवाई की आवश्यकता

इंदौर। देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्य करने का दावा करने वाले कुछ तथाकथित एंटी करप्शन संगठनों की गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विभिन्न राज्यों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि कुछ फर्जी संस्थाएं एंटी करप्शन के नाम पर व्यापारियों, ठेकेदारों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा आम नागरिकों पर दबाव बनाकर आर्थिक लाभ लेने का प्रयास कर रही हैं।

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सूत्रों के अनुसार कई संगठन बिना किसी वैधानिक अधिकार या सरकारी मान्यता के स्वयं को भ्रष्टाचार विरोधी संस्था बताकर लोगों को भयभीत करते हैं तथा जांच, शिकायत और कार्रवाई का डर दिखाकर हस्तक्षेप करते हैं। आरोप है कि ऐसे तत्व सामाजिक हित के नाम पर लोगों को गुमराह कर आर्थिक लेनदेन में अनुचित दखल देते हैं और कई मामलों में अवैध वसूली तक की घटनाएं सामने आई हैं।

हाल ही में एक ऐसा मामला भी प्रकाश में आया है, जिसमें कथित तौर पर एंटी करप्शन विभाग से जुड़े होने का दावा करने वाले कुछ लोगों द्वारा एक व्यापारी से एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी किए जाने के आरोप लगे हैं। इस घटना ने ऐसे संगठनों की कार्यप्रणाली और उनकी वैधता को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न व्यापारिक संगठनों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई एक महत्वपूर्ण विषय है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्व इस संवेदनशील मुद्दे का दुरुपयोग कर अपनी निजी स्वार्थ सिद्धि में लगे हुए हैं। इससे न केवल आम जनता का विश्वास कमजोर होता है, बल्कि वास्तविक और ईमानदारी से कार्य करने वाले सामाजिक संगठनों की छवि भी प्रभावित होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एंटी करप्शन के नाम पर संचालित सभी गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO) और संगठनों की व्यापक जांच होना आवश्यक है। जिन संस्थाओं के पास वैधानिक अधिकार, उचित पंजीयन अथवा वैध गतिविधियों का अभाव पाया जाए, उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले संचालकों और पदाधिकारियों के विरुद्ध भी कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई होना आवश्यक है।

जनहित में यह आवश्यक है कि भ्रष्टाचार विरोधी कार्यों के नाम पर चल रही फर्जी गतिविधियों पर रोक लगाई जाए, ताकि व्यापारियों, अधिकारियों और आम नागरिकों को अनावश्यक उत्पीड़न एवं आर्थिक शोषण का सामना न करना पड़े। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऐसे संगठनों की गतिविधियों की नियमित निगरानी तथा सत्यापन की व्यवस्था भी समय की मांग है।

यदि समय रहते इस प्रकार की फर्जी संस्थाओं पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की विश्वसनीयता प्रभावित होने के साथ-साथ समाज में भ्रम और अविश्वास का वातावरण भी पैदा हो सकता है। इसलिए एंटी करप्शन के नाम पर संचालित संदिग्ध एवं फर्जी संस्थाओं की पहचान कर उन पर प्रभावी कार्रवाई किया जाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है।

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