
नई दिल्ली: घर की नई दीवारों पर सफेद परत या शोरा जमना कई घर मालिकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। यह न केवल ईंटों की मजबूती को प्रभावित करता है, बल्कि प्लास्टर और पेंट को भी नुकसान पहुंचाता है। सिविल इंजीनियर अमित सिंह के अनुसार, इसका मुख्य कारण मिट्टी और पानी में मौजूद नमक है।
शोरा क्या है और क्यों आता है?
लाल ईंटों पर दिखने वाली यह सफेद परत स्थानीय भाषा में नोना या शोरा के नाम से जानी जाती है। सिविल इंजीनियरिंग में इसे एफ़्लोरेसेंस (Efflorescence) कहा जाता है। निर्माण के दौरान यदि ईंटों में नमक अधिक हो या खारे पानी का उपयोग किया गया हो, तो सूखने के बाद यह परत बाहर निकल आती है।
पानी से धोने की गलती न करें
अधिकांश लोग इसे पानी से साफ करने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह और भी बढ़ सकता है। पानी नमक को ईंटों के भीतर तक ले जाता है, जिससे शोरा और तेजी से बाहर आता है।
इमली वाला देसी जुगाड़
इंजीनियर अमित सिंह ने इसका किफायती और प्रभावी उपाय बताया। इसके लिए:
1 किलो इमली को 10 लीटर हल्के गर्म पानी में रातभर भिगोएं।
सुबह इमली को मसलकर उसका पल्प निकाल लें और पानी को छान लें।
तैयार खट्टा घोल दीवार पर पेंट की तरह ब्रश से कोट करें।
पहले कोट को 24 घंटे सूखने दें, फिर दूसरा कोट लगाएं।
इमली का एसिडिक नेचर दीवार में मौजूद नमक के रासायनिक प्रभाव को बेअसर करता है और शोरा को लगभग 90 प्रतिशत तक कम कर सकता है।
लागत और कवरेज
यह उपाय सस्ता और आसान है। 10 लीटर इमली का घोल लगभग 1500 स्क्वायर फीट क्षेत्र को कवर कर सकता है। महंगे केमिकल्स की तुलना में यह सुरक्षित और दीवारों की लंबी उम्र के लिए बेहतर विकल्प है।
निर्माण से पहले और बाद की सावधानी
ईंटें खरीदते समय मिट्टी की गुणवत्ता और पुराने ईंटों में शोरा की शिकायत की जाँच जरूर करें। अगर चिनाई हो चुकी है, तो जल्दबाजी में प्लास्टर न करें। पहले शोरा निकलने दें और उसका उपचार करें, वरना यह नई दीवार पर भी दिखाई देगा।
