
नई दिल्ली: दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में एडोबी और एक्सेंचर के शीर्ष अधिकारियों ने भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के व्यापक प्रभाव और संभावनाओं पर भरोसा जताया।
एडोबी के चेयरमैन और CEO शांतनु नारायण ने कहा कि अपनी विशाल आबादी और तेजी से बढ़ती डिजिटल तकनीक की वजह से भारत दुनिया में AI का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता बन सकता है। उन्होंने डेटा सुरक्षा और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता पर भी जोर दिया। नारायण ने कहा, “भारत सिर्फ AI मॉडल बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डेटा, प्राइवेसी, सुरक्षा और भरोसे के मामलों में भी वैश्विक उदाहरण पेश कर सकता है। डिजिटल कंटेंट की प्रमाणिकता यानी कंटेंट ऑथेंटिसिटी के क्षेत्र में भारत के पास बड़ी भूमिका निभाने का अवसर है।”
उन्होंने आगे कहा कि AI के दौर में सबसे बड़ा सवाल तकनीक का नहीं बल्कि यह है कि डेटा का उपयोग कैसे हो, लोगों की निजता कैसे सुरक्षित रहे और सिस्टम पर भरोसा कैसे कायम किया जाए। नारायण ने आश्वासन दिया कि भारत इन चुनौतियों के संतुलन को साधने में सक्षम है और सही दिशा में AI का विकास कर वैश्विक स्तर पर उदाहरण पेश कर सकता है।
वहीं, एक्सेंचर की CEO जूली स्वीट ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में AI के समावेश की सराहना की और कहा कि स्कूल स्तर से ही AI को पढ़ाई का हिस्सा बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी पिछले साल की तुलना में इस साल अधिक एंट्री-लेवल कर्मचारियों की भर्ती करेगी। जूली स्वीट ने कहा, “AI के दौर में भी एंट्री-लेवल नौकरियां जरूरी हैं, क्योंकि ये भविष्य के लीडर्स तैयार करती हैं और संगठनों को नया टैलेंट प्रदान करती हैं।”
जूली स्वीट ने यह भी कहा कि छोटे और मध्यम उद्योगों तक तकनीक और प्रतिभा की पहुंच जरूरी है। इसके लिए निजी और सरकारी साझेदारी महत्वपूर्ण होगी, और AI के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग के लिए वैश्विक मानक तय करना आवश्यक है, ताकि तकनीक का अधिकतम लाभ समाज को मिल सके।
समिट के दौरान दोनों ही CEOs ने भारत की AI क्षमता पर भरोसा जताते हुए इसे वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार देश बताया।
