
तेल अवीव/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान भारत और इजरायल के बीच एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम बनाने के लिए बड़ा समझौता होने की संभावना है। इस समझौते में उच्च तकनीक वाले हथियारों और लेजर डिफेंस सिस्टम शामिल हो सकते हैं, जो रूस के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से भी अधिक खतरनाक माने जा रहे हैं।
भारत-इजरायल रक्षा सहयोग
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दोनों देश एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस, लेजर हथियार, लॉन्ग रेंज स्टैंड-ऑफ मिसाइल और ड्रोन के जॉइंट डेवलपमेंट पर सहयोग कर सकते हैं।
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PM मोदी 25-26 फरवरी को इजरायल दौरे पर रहेंगे।
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रक्षा सहयोग के लिए पिछले साल नवंबर में एक MoU पर साइन हुआ था, जो द्विपक्षीय रक्षा तकनीक साझा करने की नींव साबित हुआ।
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इजरायल ने पिछले कुछ सालों में इतनी एडवांस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर नहीं की थी, इसलिए यह सौदा बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लेजर एयर डिफेंस: ‘आयरन बीम’
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यह दुनिया का पहला और सबसे एडवांस लेजर डिफेंस सिस्टम है।
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दिसंबर 2025 में इजरायली सेना में शामिल।
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3 लाख किमी/सेकंड की गति से हमला करता है।
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गोला-बारूद की जरूरत नहीं, सिर्फ बिजली की सप्लाई पर्याप्त।
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सैकड़ों ड्रोन को एक साथ नष्ट करने की क्षमता।
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प्रति शॉट खर्च केवल 2-3 डॉलर, पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में बेहद कम।
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पिनपॉइंट सटीकता से रॉकेट के इंजन या विस्फोटक हिस्सों को हवा में ही नष्ट करता है।
एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्यों गेमचेंजर है?
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भारत खुद का एयर डिफेंस सिस्टम ‘सुदर्शन चक्र’ बना रहा है।
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यह देश के प्रमुख शहरों, रक्षा फैसिलिटी और महत्वपूर्ण इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
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इजरायल के पास लंबी दूरी की एरो मिसाइल, मीडियम रेंज की डेविड्स स्लिंग और कम दूरी की आयरन डोम प्रणाली है।
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जून 2025 में ईरान से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों में 98 प्रतिशत इंटरसेप्ट करने में सफल।
रूसी S-400 और इजरायली सिस्टम में अंतर
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S-400 पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम है।
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‘आयरन बीम’ लेजर आधारित, तेज़ और सटीक।
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ड्रोन स्वार्म, रॉकेट्स और मोर्टार को रोकने में अधिक प्रभावी।
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ऑपरेशनल खर्च और रखरखाव दोनों में काफी कम।
इस समझौते से भारत का एयर डिफेंस अत्याधुनिक बन जाएगा और आने वाले वर्षों में देश की सुरक्षा क्षमताओं में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
