
वॉशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाने का अधिकार अपने पास नहीं था और इस तरह के निर्णय का अधिकार केवल अमेरिकी संसद के पास है।
सर्वोच्च न्यायालय ने 6-3 की बहुमत से यह फैसला सुनाया। ट्रंप प्रशासन ने पिछले वर्षों में इन टैरिफ के जरिए अरबों डॉलर का रेवेन्यू अर्जित किया था। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका ने दिसंबर 2025 तक 3,01,000 से अधिक इंपोर्टर्स से टैरिफ इकट्ठा कर 134 अरब डॉलर का राजस्व जुटाया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये जमा रकम इम्पोर्टर्स या उन देशों को लौटाई जाएगी जिनसे यह राशि प्राप्त हुई। जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने कहा कि इस विषय में कोई आदेश नहीं दिया गया है और संभव है कि निचली अदालतों को इस पर फैसला करना पड़े।
टैरिफ से अर्जित रकम की रिफंड पर अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तुरंत पैसा लौटाने की प्रक्रिया आर्थिक दृष्टि से जोखिम भरी हो सकती है।
इस फैसले के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि ट्रंप ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर टैरिफ लगाए, और अब इस मामले के आर्थिक और कानूनी परिणामों का निर्णय अगले चरण में आएगा।
