
लखनऊ/गाजियाबाद। गरीबों और जरूरतमंदों को सस्ते आवास उपलब्ध कराने के दावों के बीच गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट में वर्ष 2017 से 2022 के बीच आवास निर्माण, प्लॉट-फ्लैट आवंटन, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तय लक्ष्य का आधा भी निर्माण पूरा नहीं हो सका।
लक्ष्य 25 हजार, बने सिर्फ 9,960 EWS मकान
जीडीए ने 2017-2022 के बीच ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 25,000 मकान बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन मात्र 9,960 मकान ही बनाए जा सके। यानी करीब 60 प्रतिशत लक्ष्य अधूरा रह गया।
इंटीग्रेटेड और हाईटेक टाउनशिप परियोजनाओं में भी स्थिति निराशाजनक रही। डिवेलपर्स ने 6,382 ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकान बनाने का दावा कर लाइसेंस लिया, लेकिन हकीकत में केवल 2,133 मकान ही तैयार किए गए।
पीएम आवास योजना में भी भारी कमी
गरीबों के लिए 45,000 मकान बनाने की योजना बनी, जिसमें से 20,173 मकानों पर काम शुरू हुआ, लेकिन पूर्ण रूप से तैयार हुए सिर्फ 5,801 मकान। इससे हजारों परिवारों का पक्के घर का सपना अधूरा रह गया।
संपत्तियों की बिक्री में भी अव्यवस्था
लॉटरी, नीलामी और ‘पहले आओ-पहले पाओ’ योजना के बावजूद कई परियोजनाओं में 11% से 50% तक ही संपत्तियां बिक सकीं। हैरानी की बात यह है कि बची हुई संपत्तियों—प्लॉट, फ्लैट और व्यावसायिक इकाइयों—का कोई समुचित रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं है।
कंप्लीशन सर्टिफिकेट में भी अनियमितता
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार छह वर्षों में 1,303 भवनों के मानचित्र पास किए गए, लेकिन केवल 125 भवनों को ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया गया। शेष भवनों का ब्योरा ऑडिट टीम को उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी के संकेत मिलते हैं।
जमीन अधिग्रहण में भी फिसड्डी प्रदर्शन
नई योजनाओं के लिए करीब 300 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी थी, लेकिन मात्र 18.32 हेक्टेयर जमीन ही ली जा सकी। यानी 20 प्रतिशत से भी कम लक्ष्य पूरा हुआ।
इसके अलावा मास्टर प्लान-2021 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) से स्वीकृति नहीं मिली। इसके बाद जीडीए ने गाजियाबाद और मोदीनगर के लिए अलग-अलग मास्टर प्लान तैयार कर दिए, जिस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जवाबदेही तय करने की मांग
सीएजी की रिपोर्ट ने जीडीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आवास योजनाओं में लक्ष्य और उपलब्धि के बीच भारी अंतर, जमीन अधिग्रहण में सुस्ती और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता की कमी से साफ है कि प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई है।
अब जरूरत है कि राज्य सरकार इस मामले में जवाबदेही तय करे और दोषी अधिकारियों व डिवेलपर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि गरीबों के घर का सपना कागजों में नहीं, जमीन पर साकार हो सके।
