Thursday, February 19

औरंगजेब का घमंड चूर करने का संदेश: काशी से आए पंडित गागभट्ट ने शिवाजी को क्या कहा?

नई दिल्ली/पुणे: पूरे देश में 19 फरवरी को शिवाजी महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। इस मौके पर पुणे जिले के शिवनेरी किले में भगदड़ मच गई, जहां छत्रपति शिवाजी का जन्म हुआ था।

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पंडित गागभट्ट का संदेश

1674 में काशी से आए पंडित गाग भट्ट ने शिवाजी महाराज से कहा था:
“आपने मुस्लिम सुल्तानों को परास्त किया, औरंगजेब को शांत किया, और उनका घमंड तोड़ा। अब अपना राज्याभिषेक करवाकर आप सम्मानपूर्वक राजा का ताज पहनें। औपचारिक राज्याभिषेक के बिना शासक राजा का कोई सम्मान नहीं होता।”

इस संदेश का उद्देश्य था शिवाजी को राजसी छत्र के राजा के रूप में प्रतिष्ठित करना और उनके विजयों का औपचारिक प्रमाण देना। इतिहासकार नीलकांत सदाशिव ताकाखाव की किताब The Life of Shivaji Maharaj में इसका विवरण मिलता है।

राज्याभिषेक और शिवनेरी का किला

पंडित गागभट्ट ने 6 जून 1674 को रायगढ़ किले में वैदिक मंत्रों के साथ शिवाजी का राज्याभिषेक किया। उन्होंने यह भी घोषित किया कि शिवाजी के पूर्वज क्षत्रिय थे। राज्याभिषेक में सात पवित्र नदियों – गंगा, यमुना, नर्मदा, सिंधु, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी – का पानी सोने के पात्र में मंगवाकर शिवाजी को सिर पर डालकर मंत्रों के साथ नहलाया गया।

राज्याभिषेक के बाद शिवाजी ने अपनी मां जीजाबाई के चरण छुए और आशीर्वाद लिया। साथ ही, उन्होंने इंद्राभिषेक अनुष्ठान भी कराया, जो 9वीं शताब्दी से बंद हो गया था। इसके बाद उन्हें ‘शककर्ता’ की उपाधि प्रदान की गई।

शिवनेरी किले का इतिहास

शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी किले में हुआ। उनकी मां जीजाबाई ने 1632 में शिवाजी को वहां से ले लिया। 1637 में निजाम के समझौते के तहत किला मुगलों के कब्जे में चला गया।
1650 में कोली समुदाय ने विद्रोह किया, लेकिन किला मुगलों के पास रहा। शिवाजी ने 1673 और 1678 में इसे अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुए। अंततः 1716 में शिवाजी के पोते शाहू जी महाराज ने इसे मराठों के नियंत्रण में लिया और बाद में पेशवाओं को सौंप दिया।

जयंती पर श्रद्धांजलि

शिवाजी महाराज की 19 फरवरी की जयंती पर शिवनेरी किले में बड़ी संख्या में लोग जुटे। भगदड़ में कई महिलाएं और बच्चे घायल हो गए।

शिवाजी का जीवन और राज्याभिषेक आज भी वीरता, नेतृत्व और न्यायप्रियता का प्रतीक माना जाता है।

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