
सीतामढ़ी/पटना: बिहार सरकार ने डिफॉल्टर पैक्स अध्यक्षों पर शिकंजा कस दिया है। राज्य के सहकारिता विभाग ने 33 पैक्स अध्यक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उनके बकाए 10 करोड़ 31 लाख 12 हजार 42 रुपये की वसूली शुरू कर दी है। इसमें मूल धन 8.39 करोड़ और ब्याज 1.92 करोड़ रुपये शामिल हैं। अब तक 1.55 करोड़ की राशि वसूली जा चुकी है, जबकि 8.76 करोड़ रुपये बकाया हैं।
10–12 साल बाद हुई कार्रवाई
सूबे में धान और गेहूं की खरीद के लिए पैक्सों को सहकारिता बैंक से ऋण मिलता है। करीब 10–12 साल पहले सैकड़ों पैक्सों ने यह राशि लेकर लौटाई नहीं। बार-बार नोटिस देने के बावजूद कोई भी अध्यक्ष कर्ज लौटाने में रुचि नहीं दिखा रहा था। इस पर जिला सहकारिता विभाग ने संबंधित 33 पैक्स अध्यक्षों को डिफॉल्टर घोषित किया और FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की। इसके साथ ही बकाया राशि वसूलने के लिए नीलामी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई।
FIR और नीलामी की कार्रवाई
33 पैक्स अध्यक्षों में डुमरा प्रखंड के भासर मच्छहां दक्षिणी के राम सरल दुबे, मेहसौल पूर्वी के मो. मुलिम, रसलपुर की खुशबू कुमारी और रामपट्टी की मीना देवी समेत कई नाम शामिल हैं। वहीं, सोनबरसा, मेजरगंज, रून्नीसैदपुर, सुप्पी, परिहार, परसा, बेतहा और जगदर प्रखंड के भी कई अध्यक्ष इस सूची में हैं। 27 अध्यक्षों पर FIR दर्ज की गई, जबकि 19 पर नीलामी की कार्रवाई हुई।
हाईकोर्ट में मामला
कुछ अध्यक्षों ने पटना हाईकोर्ट में मामला दायर किया है। उनके अनुसार, अग्रिम के रूप में मिलर को धान दिया गया था, लेकिन चावल की आपूर्ति नहीं हुई। इसके बावजूद विभागीय कार्रवाई पैक्स अध्यक्षों के खिलाफ की गई, जबकि मिलर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सहकारिता बैंक के एमडी संजीव कुमार सिंह ने बताया कि पेंडिंग ऋण वसूली के लिए पैक्स अध्यक्षों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
बिहार सरकार का यह कदम यह संदेश देता है कि डिफॉल्टर पैक्सों को अब कोई राहत नहीं दी जाएगी और बकाया राशि वसूली में तेजी लाई जाएगी।
