Wednesday, February 18

ईरान के पड़ोस में अमेरिकी F-22 और F-35 तैनात, 50 फाइटर जेटों के साथ बड़े हमले की आशंका?

वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 18 फरवरी 2026: अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में परमाणु वार्ता जारी रहने के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। मंगलवार को अमेरिकी सेना ने 50 से अधिक फाइटर जेट इस क्षेत्र में तैनात किए, जिससे ईरान पर संभावित हमले का अंदेशा बढ़ गया है।

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अमेरिकी एयरक्राफ्ट का घेरा

अमेरिकी अधिकारियों और फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, F-22, F-35 और F-16 फाइटर जेटों को ईरान के आसपास भेजा गया। इन जेटों के साथ एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर भी पहुंचे हैं, जो संकेत देते हैं कि एयरक्राफ्ट लगातार ऑपरेशन के लिए तैयार हैं।

अमेरिकी नेवी की बढ़ी मौजूदगी

अमेरिकी नौसेना का USS Gerald R. Ford एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कैरिबियन से मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर — USS Great, USS Bainbridge और Winston Churchill — भी इस इलाके में मौजूद होंगे। इसके अलावा USS Abraham Lincoln और अन्य नेवल एसेट्स को साल की शुरुआत में ही ईरान के आसपास तैनात कर दिया गया था।

परमाणु वार्ता में प्रगति

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर मंगलवार को अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच जिनेवा में बातचीत हुई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे सकारात्मक बताया और कहा कि दोनों पक्षों ने ‘गाइडिंग प्रिंसिपल्स’ पर सहमति बना ली है। इन सिद्धांतों के आधार पर अब मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

अराघची ने कहा, “अब हमारे पास आगे बढ़ने का स्पष्ट और सकारात्मक रास्ता बन गया है। हालांकि वार्ता अभी पूरी नहीं हुई है और कई विवरणों पर आगे चर्चा होनी बाकी है।”

तनाव और कूटनीति का संतुलन

फिलहाल अमेरिका की इस फाइटर जेट और नौसेना तैनाती ने सैन्य दबाव बढ़ा दिया है, जबकि जिनेवा वार्ता से कूटनीतिक समाधान की उम्मीद भी बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संतुलन अमेरिका और ईरान के बीच आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा की दिशा तय करेगा।

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