Wednesday, February 18

कौन हैं सुमन शेखर? जिन्होंने असम विधानसभा को बनाया ‘स्मार्ट’, CM हिमंत बिस्वा सरमा हुए मुरीद

औरंगाबाद: बिहार की मिट्टी ने एक बार फिर देश के पटल पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। औरंगाबाद जिले के छोटे से गांव चिरइयांटांड़ से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ने वाले युवा उद्यमी सुमन शेखर ने असम विधानसभा को पूरी तरह डिजिटल और ‘स्मार्ट’ बनाकर इतिहास रच दिया है।

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी सुमन शेखर और उनकी टीम की इस उपलब्धि की खुले दिल से सराहना की। सुमन शेखर की टीम ने AI और मशीन लर्निंग आधारित ALISA एप्लिकेशन तैयार किया है, जो हिंदी, अंग्रेजी, असमिया और बोडो भाषाओं में संवाद कर सकता है।

हिमंत बिस्वा सरमा क्यों हुए सुमन शेखर के मुरीद?

सुमन शेखर की टीम ने असम विधानसभा के 1937 से अब तक के सभी ऐतिहासिक दस्तावेज, सदन की कार्यवाही और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड्स को डिजिटल स्वरूप में तब्दील कर दिया। अब सदन का सारा डेटा बस एक क्लिक में टैबलेट पर उपलब्ध हो जाता है। इस डिजिटल डेमो को देखकर मुख्यमंत्री सरमा बेहद प्रभावित हुए और टीम को बधाई दी।

सुमन शेखर कौन हैं?

सुमन शेखर, औरंगाबाद जिले के कुटुम्बा प्रखंड के चिरइयांटांड़ गांव के रहने वाले हैं। मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे सुमन की शुरुआती पढ़ाई अम्बा क्षेत्र के स्कूलों में हुई। इसके बाद उन्होंने सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज से इंटर की परीक्षा पास की और आगे की पढ़ाई के लिए जयपुर चले गए। जयपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने नौकरी करने की बजाय खुद का रास्ता बनाने का निर्णय लिया।

क्या काम करती है सुमन शेखर की कंपनी?

सुमन शेखर गुरुग्राम आकर Abhastra Foundation की स्थापना की। उनकी कंपनी शिक्षा, लॉजिस्टिक्स, रेलवे और सरकारी तकनीकी समाधान जैसे क्षेत्रों में कार्यरत है। साथ ही राजनीतिक तंत्र में डिजिटल तकनीक के उपयोग में भी कई नवाचार कर चुकी है।

प्रकृति प्रेमी भी हैं सुमन शेखर

तकनीकी विशेषज्ञ होने के साथ-साथ सुमन शेखर प्रकृति प्रेमी भी हैं। वे अपने गांव में पक्षियों के लिए लकड़ी के घोंसले लगवाते हैं, पौधारोपण अभियान चलाते हैं और पर्यावरण संरक्षण को लेकर युवाओं को जागरूक कर रहे हैं।

सुमन शेखर अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और मित्रों को देते हैं। आज बिहार का यह युवा न केवल औरंगाबाद जिले बल्कि पूरे राज्य के लिए प्रेरणा बन चुका है।

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