Wednesday, February 18

CM मोहन यादव बोले- गर्मी और कठिन रास्तों में विदेशी नस्लों से ज्यादा सक्षम हैं भारतीय नस्लें

भोपाल। मध्य प्रदेश के जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के श्वान दस्ते (K9 यूनिट) में अब विदेशी नस्लों की जगह देसी यानी भारतीय नस्ल के कुत्तों को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। उनका मानना है कि जर्मन शेफर्ड और बेल्जियम मैलिनोइस जैसी विदेशी नस्लों की तुलना में देसी कुत्ते मध्य प्रदेश की भीषण गर्मी और कठिन जंगल क्षेत्रों में ज्यादा प्रभावी साबित होंगे।

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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य में जल्द ही ‘देसी K9 वाइल्डलाइफ यूनिट’ के गठन के लिए विस्तृत योजना तैयार की जाए।

वन्यजीव बोर्ड की बैठक में रखा गया प्रस्ताव

यह प्रस्ताव सोमवार को आयोजित मध्य प्रदेश राज्य वन्यजीव बोर्ड की 31वीं बैठक में रखा गया। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि वन अपराधों पर नियंत्रण और शिकारियों की गिरफ्तारी के लिए आधुनिक तकनीक के साथ-साथ प्रशिक्षित श्वान दस्ते की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

अब योजना है कि देसी नस्ल के कुत्तों को वैज्ञानिक पद्धति से प्रशिक्षण देकर उन्हें जंगलों में गश्त, शिकारियों की ट्रैकिंग, अपराध स्थल की जांच और वन्यजीव अपराधों की पहचान जैसे कार्यों में लगाया जाए।

18 सक्रिय कुत्ते कर रहे सेवा

वन विभाग के अनुसार फिलहाल राज्य के फॉरेस्ट डॉग स्क्वाड में 18 सक्रिय कुत्ते कार्यरत हैं, जबकि 5 कुत्ते सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वर्ष 2010 में गठित यह श्वान दस्ता पिछले 15 वर्षों में 612 वन्यजीव अपराधों को सुलझाने और 1,340 आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद कर चुका है। इनमें बाघ और तेंदुए के शिकार से जुड़े कई बड़े मामले भी शामिल हैं।

अब तक ये कुत्ते कोलकाता की टाइगर सेविंग सोसाइटी से लिए जाते रहे हैं और पंचकुला, ग्वालियर तथा भोपाल के प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षित किए जाते हैं।

देसी कुत्तों में ज्यादा सहनशक्ति, कम खर्च

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लंबी दूरी की गश्त, घने जंगलों और गर्म वातावरण में विदेशी नस्लों को कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं देसी कुत्तों में गर्मी सहने की बेहतर क्षमता, ज्यादा सहनशक्ति और कम रखरखाव खर्च जैसी विशेषताएं होती हैं।

यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने देसी नस्लों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।

इन बिंदुओं पर बनेगी योजना

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वन विभाग को निर्देश दिए हैं कि योजना तैयार करते समय निम्न पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए—

  • उपयुक्त देसी नस्लों का चयन

  • विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करना

  • पशु चिकित्सा सहायता एवं देखरेख

  • बाघ अभयारण्यों और हाथी गलियारों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रायोगिक तैनाती

  • रात में ट्रैकिंग और शिकार विरोधी अभियानों में उपयोग

  • मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले इलाकों में त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था

इसके साथ ही पुलिस K9 यूनिट और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों के सहयोग से यह यूनिट विकसित की जाएगी।

वन अपराधियों पर अब और कड़ा प्रहार

मुख्यमंत्री के इस फैसले को जंगलों में वन्यजीव सुरक्षा के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। यदि योजना सफल होती है, तो देसी कुत्तों की यह नई यूनिट जंगलों में सक्रिय शिकारियों और तस्करों को पकड़ने में बड़ा हथियार साबित हो सकती है।

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