
नई दिल्ली, 17 फरवरी 2026: साउथ की मशहूर अभिनेत्री प्रत्युषा की मौत के 23 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने मौत को हत्या नहीं माना, लेकिन उनके बॉयफ्रेंड सिद्धार्थ रेड्डी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी करार दिया है।
अदालत का फैसला और प्रमुख बिंदु
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सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसका नेतृत्व जस्टिस राजेश बिंदल ने किया, ने प्रत्यक्षदर्शियों और मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर हत्या की आशंका से इनकार किया।
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अदालत ने कहा कि मृत्यु जहर खाने से हुई थी, न कि गला घोंटकर हत्या की गई।
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अपीलकर्ता के खिलाफ बलात्कार का आरोप सिद्ध नहीं हुआ।
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न्यूरोनटोन की खरीद के माध्यम से सिद्धार्थ के उकसावे का आरोप साबित हुआ।
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अदालत ने मृत अभिनेत्री की मां सरोजिनी देवी की याचिका भी खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की मृत्यु हत्या से हुई।
मामला क्या था
22 फरवरी 2002 को प्रत्युषा ने अपने बॉयफ्रेंड सिद्धार्थ रेड्डी के साथ जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की। दोनों प्रेम संबंध में थे, लेकिन परिवार के सदस्य इस रिश्ते से संतुष्ट नहीं थे। अस्पताल में इलाज के दौरान प्रत्युषा की मौत हो गई, जबकि सिद्धार्थ बच गए। इस घटना के बाद परिवार ने हत्या का संदेह जताया।
कोर्ट में सजा और चुनौती
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पहले उच्च न्यायालय ने सिद्धार्थ रेड्डी को पांच साल की सजा सुनाई थी, जिसे 2004 में दो साल तक घटा दिया गया।
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इसके बाद रेड्डी ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी थी।
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प्रत्युषा की मां ने भी सजा कम करने के फैसले को चुनौती दी थी और दावा किया था कि उनकी बेटी के साथ बलात्कार और जहर देने की घटना हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि सिद्धार्थ रेड्डी को चार सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा।
