
नई दिल्ली: चीन की अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर संकट से गुजर रही है। घरेलू विकास में मंदी और विकसित बाजारों में बढ़ती व्यापार बाधाओं के कारण कई चीनी कंपनियां मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। ऐसे में चीन अपनी आर्थिक गति बनाए रखने के लिए भारत में निवेश के अवसर तलाश रहा है।
चीन की जीडीपी और आर्थिक स्थिति
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पिछले साल की 5% ग्रोथ के मुकाबले चीन की मौजूदा तिमाही जीडीपी केवल 4.5% रही, जो पिछले तीन साल का सबसे निचला स्तर है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक अगले सालों में सुधार नहीं आया तो चीन की विकास दर घटकर 2.5% तक रह सकती है।
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लंबे समय से चल रही प्रॉपर्टी बाजार की गिरावट और कमजोर मांग ने स्थिति और कठिन बना दी है।
भारत क्यों बना चीन का आकर्षक विकल्प
चीन की कंपनियां भारत के बढ़ते हुए उपभोक्ता बाजार और प्रोत्साहन-संचालित विनिर्माण नीति की ओर आकर्षित हैं। प्रमुख सेक्टर जिसमें चीन निवेश करना चाहता है:
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इलेक्ट्रॉनिक्स
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ऑटोमोबाइल
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मशीनरी
भारत की विशाल जनसंख्या, स्मार्टफोन और ऑटोमोबाइल ब्रांडों के लिए एक बड़ा बाजार प्रदान करती है। चीन की कंपनियों को भारत में निवेश करने से घरेलू मंदी का संतुलन बनाने और नई संभावनाएं तलाशने में मदद मिल सकती है।
भारत सरकार का संभावित कदम
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भारत सरकार चीन समेत पड़ोसी देशों से छोटे विदेशी निवेश (FDI) को ऑटोमेटिक अप्रूवल देने पर विचार कर रही है।
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इसका मकसद विदेशी निवेश को सरल बनाना और भारत में नए निवेशकों के लिए आकर्षक माहौल तैयार करना है।
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प्रेस नोट 3 की समीक्षा के तहत ‘de minimis’ सीमा तय करने की संभावना पर भी विचार चल रहा है।
इंडस्ट्री की मांग
कुछ महीने पहले भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने सरकार से चीन की कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर (JV) की अनुमति देने का आग्रह किया था, बशर्ते उनकी इक्विटी हिस्सेदारी 26% तक सीमित रहे। इसके पीछे कारण है कि चीनी कंपनियां पूंजी, तकनीक और स्थापित सप्लाई चेन ला सकती हैं, जो भारत में बड़े पैमाने पर कमी है।
निष्कर्ष: चीन की अर्थव्यवस्था के लिए भारत अब एक महत्वपूर्ण विकल्प बन गया है। भारत में निवेश से न केवल चीन को राहत मिल सकती है, बल्कि भारत की घरेलू इंडस्ट्री और उपभोक्ता बाजार को भी फायदा मिलेगा।
