
नई दिल्ली: एक समय था जब लोग पैसों के लेन-देन के लिए कैश पर निर्भर रहते थे। बाद में डेबिट और क्रेडिट कार्ड का चलन बढ़ा, लेकिन अब UPI (Unified Payments Interface) ने डिजिटल पेमेंट की दुनिया में राज करना शुरू कर दिया है। सिर्फ फोन निकालो, QR कोड स्कैन करो और पैसा पलक झपकते ही दूसरे के अकाउंट में। आज डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी 80% तक पहुंच गई है, जिससे यह सबसे पसंदीदा भुगतान माध्यम बन गया है।
डिजिटल पेमेंट में तेजी
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाओं के विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 से 2025 के बीच डिजिटल ट्रांजेक्शन लगभग 11 गुना बढ़ गए हैं। UPI QR कोड का इस्तेमाल 9.3 करोड़ से बढ़कर 65.8 करोड़ हो गया है। फिनटेक और बैंकों की भागीदारी बढ़ी है और थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर की संख्या 16 से बढ़कर 38 हो गई है, जिससे पूरा डिजिटल पेमेंट सिस्टम और मजबूत हुआ है।
युवाओं ने बदली तस्वीर
18 से 25 साल के युवाओं में UPI का इस्तेमाल बढ़कर 66% तक पहुंच गया है। यह दर्शाता है कि युवा पीढ़ी अब डिजिटल तरीके से पैसों का लेन-देन करने में पूरी तरह आदी हो रही है।
UPI की बढ़ती ताकत
भारत में UPI अब कुल भुगतान लेन-देन का 57% हिस्सा है, जो नकदी (38%) से कहीं आगे है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 65% UPI उपयोगकर्ता दिन में कई बार डिजिटल लेन-देन करते हैं। मार्च 2021 में 216 बैंक UPI प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे थे, जो मार्च 2025 तक बढ़कर 661 बैंक हो गए हैं।
कैश का इस्तेमाल घटा
UPI और RuPay कार्ड के इस्तेमाल के बाद 90% लोगों का डिजिटल पेमेंट पर भरोसा बढ़ा। नकदी और ATM से पैसे निकालने की जरूरत भी कम हुई है। 52% उपयोगकर्ताओं को UPI में कैशबैक मिला, जबकि 74% ने पेमेंट की गति को सबसे बड़ा फायदा बताया।
व्यापारी भी हुए दीवाने
UPI ने सिर्फ ग्राहकों का नहीं, बल्कि व्यापारियों का भी ध्यान खींचा है। 94% छोटे व्यापारी अब UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं। लगभग 72% व्यापारी डिजिटल भुगतान से खुश हैं और 57% ने इसे अपनाने के बाद अपनी बिक्री में वृद्धि भी बताई। तेज लेन-देन, बेहतर रिकॉर्ड और काम में आसानी जैसी सुविधाओं ने व्यापारियों को डिजिटल भुगतान की ओर खींचा है।
निष्कर्ष: कैश और कार्ड की जगह अब UPI ले चुका है। देश में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है और यह न केवल उपभोक्ताओं बल्कि व्यापारियों के लिए भी सबसे आसान और भरोसेमंद विकल्प बन गया है।
