
बेंगलुरु। कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सतह पर आ गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार द्वारा कांग्रेस विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाए जाने के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने समर्थक 27 विधायक और एमएलसी को ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड के विदेशी दौरे पर भेजने की अनुमति देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल एक “रूटीन टूर” नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर शक्ति प्रदर्शन और नेतृत्व को लेकर चल रही रस्साकशी का संकेत है।
डीके शिवकुमार ने बुलाई विधायकों की बैठक
सूत्रों के अनुसार, डीके शिवकुमार ने बजट सत्र से पहले पार्टी संगठन को मजबूत करने और विधायकों के साथ रणनीतिक चर्चा के लिए बैठक आयोजित की थी। इस बैठक को प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर डीके की ताकत और पकड़ दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा था।
लेकिन ठीक उसी समय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया समर्थक विधायकों को विदेश दौरे की अनुमति मिलने से बैठक की अहमियत पर सवाल उठने लगे।
27 समर्थक विधायक विदेश रवाना, संदेश साफ माना जा रहा
मंगलवार को सिद्धारमैया समर्थक 27 विधायक और एमएलसी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरे पर रवाना होने वाले हैं। इससे यह चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री ने यह कदम जानबूझकर उठाया ताकि डीके शिवकुमार की बैठक में उपस्थिति कम रहे और उनके प्रभाव को सीमित किया जा सके।
एक साल से जारी है सीएम पद को लेकर संघर्ष
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर असंतोष की बातें लगातार उठती रही हैं। 20 मई 2023 को सिद्धारमैया ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। तभी से डीके शिवकुमार को भविष्य के मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया जाता रहा है।
नवंबर 2025 में सरकार के ढाई साल पूरे होने से पहले ही डीके समर्थकों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की मुहिम तेज कर दी थी। हालांकि दिल्ली हाईकमान ने मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन दोनों खेमों की सक्रियता से विवाद थमता नजर नहीं आया।
डीके ने हाईकमान से की शिकायत, सुरजेवाला ने रद्द करने को कहा
बताया जा रहा है कि डीके शिवकुमार ने इस मामले को लेकर हाईकमान से शिकायत भी की। इसके बाद कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने विधायकों से विदेश दौरे का कार्यक्रम रद्द करने को कहा।
जानकारी के मुताबिक, जो विधायक डीके समर्थक थे, उन्होंने अपना विदेश दौरा रोक दिया, लेकिन सिद्धारमैया समर्थक 27 विधायक और एमएलसी यात्रा पर अड़े रहे।
राजनीतिक संकेत या सामान्य दौरा?
विदेश जाने वाले विधायकों का कहना है कि यह यात्रा पहले से तय थी और इसे राजनीतिक रंग देना गलत है। लेकिन राजनीतिक जानकार इसे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की रणनीतिक चाल मान रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि डीके शिवकुमार की बैठक में बड़ी संख्या में विधायक शामिल नहीं होते, तो इससे उनके नेतृत्व और संगठनात्मक शक्ति पर असर पड़ सकता है।
कांग्रेस में ‘सीजफायर’ के दावों के बावजूद अंदरखाने तनाव बरकरार
हालांकि सार्वजनिक मंचों पर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ही पार्टी में एकता और तालमेल की बात करते रहे हैं, लेकिन इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
