
पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘जननायक’ के नाम से विख्यात भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की आज पुण्यतिथि है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
कर्पूरी ठाकुर का नाम भारतीय राजनीति में केवल एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि ईमानदारी, सादगी और जनसेवा के प्रतीक के रूप में लिया जाता है। सत्ता के सर्वोच्च पद पर रहते हुए भी उनका जीवन आम आदमी की तरह सादा रहा। उनकी सादगी का आलम यह था कि उनके निधन तक उनके पैतृक गांव में उनके नाम पर कोई निजी पक्का मकान तक नहीं था।
कुर्ते के लिए मिला चंदा, लेकिन राहत कोष में दान कर दी पूरी राशि
कर्पूरी ठाकुर की ईमानदारी का एक मार्मिक प्रसंग पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि एक बार मुख्यमंत्री आवास में बैठक के दौरान चंद्रशेखर ने देखा कि कर्पूरी ठाकुर के कुर्ते की जेब फटी हुई है। यह देखकर वे भावुक हो गए और बैठक में मौजूद लोगों से तुरंत चंदा इकट्ठा करवाया।
उन्होंने वह राशि कर्पूरी ठाकुर को देते हुए कहा कि इससे नया कुर्ता सिलवा लीजिए। लेकिन जननायक ने उस धन का उपयोग स्वयं पर करने के बजाय, पूरी रकम मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करवा दी।
उनके लिए व्यक्तिगत जरूरतों से अधिक महत्वपूर्ण जनता और राज्य का हित था।
फटा कोट पहनकर विदेश दौरे पर पहुंचे थे ऑस्ट्रेलिया
कर्पूरी ठाकुर का जीवन डॉ. राम मनोहर लोहिया के सिद्धांत ‘कथनी और करनी में एकता’ का जीवंत उदाहरण रहा। उनकी सादगी केवल देश तक सीमित नहीं थी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दौरों में भी यह स्पष्ट दिखाई देती थी।
बताया जाता है कि जब वे एक प्रतिनिधिमंडल के साथ ऑस्ट्रेलिया जाने वाले थे, तो उनके पास पहनने के लिए कोट तक नहीं था। ऐसे में उन्होंने एक मित्र से पुराना कोट उधार लिया, जो फटा हुआ था।
इसके बावजूद उन्होंने उसी फटे कोट को पहनकर विदेश यात्रा की।
इतना ही नहीं, जब यूगोस्लाविया के मार्शल टीटो की नजर उनके फटे कोट पर पड़ी, तो वे आश्चर्यचकित रह गए। टीटो ने सम्मान स्वरूप उन्हें नया कोट उपहार में दिया, जिसे कर्पूरी ठाकुर की सादगी और ईमानदारी के प्रति सम्मान माना गया।
समाजवादी विचारधारा के अडिग सिपाही
24 जनवरी 1924 को जन्मे कर्पूरी ठाकुर छात्र जीवन से ही समाजवादी आंदोलन से जुड़ गए थे। वे जयप्रकाश नारायण और डॉ. राम मनोहर लोहिया को अपना आदर्श मानते थे। उन्होंने जीवन भर गैर-कांग्रेसवाद, सामाजिक न्याय और भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति की अलख जगाई।
मुख्यमंत्री रहते हुए भी वे दिखावे से दूर रहते थे और कई बार रिक्शे से यात्रा करना पसंद करते थे। सत्ता और सुविधा के बीच रहते हुए भी सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करना ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।
आज भी राजनीति में शुचिता का प्रती
कर्पूरी ठाकुर का जीवन आज भी उन नेताओं के लिए प्रेरणा है जो राजनीति को सेवा मानते हैं। उनकी सादगी, ईमानदारी और जनता के प्रति समर्पण उन्हें भारतीय राजनीति में शुचिता और नैतिकता का प्रतीक बनाता है।
जननायक कर्पूरी ठाकुर की पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है और उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प ले रहा है।
