Tuesday, February 17

कुछ घंटों में मंजूरी मिलने पर उठा सवाल, विपक्ष ने जांच की मांग की, सरकार ने दिए आदेश

मुंबई। महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को राज्यभर के कम से कम 75 शिक्षण संस्थानों को दिए गए अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के प्रमाणपत्रों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया है।

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इन संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने की मंजूरी ऐसे समय पर दी गई, जब विभाग प्रमुख और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हुए कुछ ही घंटे बीते थे। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई और विपक्ष ने मामले की गहन जांच की मांग की।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है।

सुबह निधन, दोपहर तक आवेदन स्वीकृत!

विपक्ष का आरोप है कि अजित पवार की मृत्यु के कुछ ही घंटों बाद विभाग में अचानक प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी गई।

भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) की महाराष्ट्र इकाई के महासचिव अक्षय जैन ने दावा किया कि अजित पवार का निधन सुबह हुआ और दोपहर तक कई शिक्षण संस्थानों के आवेदन स्वीकृत कर दिए गए।

जैन के अनुसार, 28 जनवरी से 3 फरवरी के बीच करीब 75 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दे दिया गया, जो संदेह पैदा करता है। उन्होंने इसे “सांठगांठ” करार देते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस और विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप

मामले को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार पर हमला बोला है।

रोहित पवार ने कहा कि केवल प्रमाणपत्रों पर रोक लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे प्रकरण की एसआईटी या स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि हर प्रमाणपत्र जारी करने के बदले 25 लाख रुपये तक की वसूली की गई।

हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि ये मंजूरियां किसके आदेश पर दी गईं और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

सुनेत्रा पवार ने बुलाई आपात बैठक

अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री बनी हैं और अल्पसंख्यक मामलों का विभाग भी उनके पास है।

सूत्रों के अनुसार, सुनेत्रा पवार ने इस विवाद को गंभीरता से लेते हुए मुंबई में एक आपातकालीन बैठक बुलाई और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रमाणपत्र जारी करने में लापरवाही या भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

अल्पसंख्यक आयोग ने जताई चिंता

राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने बताया कि महाराष्ट्र में पहले से ही 3,300 से अधिक शिक्षण संस्थान अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त कर चुके हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कई संस्थानों पर आरोप हैं कि वे अल्पसंख्यक दर्जे का लाभ लेकर सरकारी सुविधाएं तो उठा रहे हैं, लेकिन छात्रों को वास्तविक लाभ नहीं पहुंचा रहे।

खान ने बताया कि कुछ संस्थानों में फर्जी शिक्षकों और नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं, जिनमें शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।

अल्पसंख्यक दर्जे का लाभ और दुरुपयोग

जानकारों के मुताबिक, अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त स्कूलों को कई विशेष छूट मिलती है। इनमें प्रमुख रूप से—

  • शिक्षा के अधिकार (RTE) कोटा के तहत प्रवेश में छूट

  • शिक्षक नियुक्ति में अधिक स्वतंत्रता

  • कई मामलों में टीईटी जैसी अनिवार्य योग्यताओं में ढील

आयोग का कहना है कि कुछ संस्थानों ने इस सुविधा का दुरुपयोग कर अयोग्य रिश्तेदारों की नियुक्ति की, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा।

राजनीति गरम, जांच के बाद खुल सकते हैं बड़े राज

इस पूरे मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। विपक्ष इसे बड़े भ्रष्टाचार का मामला बता रहा है, वहीं सरकार ने जांच के आदेश देकर फिलहाल स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अल्पसंख्यक दर्जा देने की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या फिर किसी बड़े घोटाले की पटकथा लिखी गई।

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