
उज्जैन (प्रेम सिंह डोडिया, आकाश सिकरवार) – विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि महापर्व का समापन बाबा महाकाल के सेहरा दर्शन के साथ हुआ। 16 फरवरी को भगवान महाकाल को दूल्हे के रूप में सजाया गया और उन्हें पुष्प मुकुट (सेहरा) पहनाया गया। यह साल में केवल एक बार होने वाली विशेष भस्मारती थी, जो दोपहर 12 बजे शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चली।
रुद्राभिषेक और पंचामृत से हुआ अभिषेक
सुबह 11 ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के साथ रुद्राभिषेक किया। इसके बाद पंचामृत और पांच प्रकार के फलों के रस से भगवान का पूजन हुआ। बाबा महाकाल को नए वस्त्र और सप्तधान्य का मुखौटा पहनाया गया। पूजा के दौरान भगवान को चंद्र मुकुट, छत्र, त्रिपुंड और अन्य आभूषणों से भी सजाया गया।
पुष्प सेहरा और भोग आरती
सप्तधान्य में चावल, खड़ा मूंग, तिल, गेहूं, जौ, साल और खड़ा उड़द शामिल थे। भस्मारती के बाद पुष्पों से बने मुकुट के साथ आरती हुई और भगवान को पंचमेवा, मिठाइयां और फल अर्पित किए गए।
दोपहर 12 से 2 बजे तक भस्मारती
भस्म आरती का आयोजन दोपहर 12 बजे शुरू हुआ और दोपहर 2 बजे समाप्त हुआ। इसके पश्चात भोग आरती का आयोजन किया गया। शाम को पूजा और शयन आरती के साथ ही मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे।
यह महाशिवरात्रि पर्व बाबा महाकाल के भक्तों के लिए एक भव्य और धार्मिक अनुभव का अवसर बन गया। भक्तजन सुबह से ही मंदिर में दर्शन और भस्मारती में भाग लेने के लिए पहुंचे।
