
नई दिल्ली: इस फाइनेंशियल ईयर में बैंकों ने लोन देने की रफ्तार में जमा राशि की बढ़त को पीछे छोड़ दिया है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 तक क्रेडिट ग्रोथ 12.2% रही, जबकि डिपॉजिट ग्रोथ 10.2% तक सीमित रही। इसका मतलब है कि हर 100 रुपये के नए डिपॉजिट पर बैंक करीब 97 रुपये कर्ज के रूप में दे रहे हैं।
किसे और क्यों मिल रहा कर्ज
नॉन-फूड क्रेडिट पिछले साल के मुकाबले बढ़कर 203.9 लाख करोड़ रुपये हो गया। बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश लेंडिंग हाउसहोल्ड सेविंग्स और आर्थिक गतिविधियों पर आधारित है, जिससे क्रेडिट की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
एसबीआई के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने बताया कि उनका बैंक अगले दो तिमाहियों में कम से कम 10% कॉरपोरेट क्रेडिट बढ़ाने का लक्ष्य रख रहा है। इसी तरह, होम और ऑटो लोन में भी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना है।
आगे की संभावनाएं
आईसीआईसीआई बैंक के सीएफओ अनिंद्य बनर्जी ने कहा कि लोन की गति लगातार बनी हुई है और चौथी तिमाही में भी यही स्थिति जारी रहने की उम्मीद है।
केनरा बैंक के एमडी एवं सीईओ हरदीप सिंह अहलूवालिया ने बताया कि रिटेल और एमएसएमई लोन में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। रिटेल लोन में 31.4% और एमएसएमई में 13.7% ग्रोथ देखी गई है।
इस स्थिति से स्पष्ट है कि बैंकों की क्रेडिट गतिविधियां मजबूत हैं, लेकिन इससे सिस्टम लिक्विडिटी पर दबाव भी बढ़ रहा है।
