
मॉस्को/बर्लिन, 16 फरवरी 2026: रूस ने अंतरिक्ष में अपनी ताकत बढ़ाकर पश्चिमी देशों के लिए गंभीर चिंता पैदा कर दी है। पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार रूस सैटेलाइट वॉरफेयर के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है और इसके पास स्पेस में परमाणु हमला करने की क्षमता भी है।
रूस की अंतरिक्ष रणनीति
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रूस ने अंतरिक्ष में जासूसी अभियान शुरू किया है। इसके तहत दो स्पेसक्राफ्ट Luch-1 और Luch-2 पश्चिमी देशों के सैटेलाइट्स के करीब पहुंचे हैं।
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ये स्पेसक्राफ्ट सैटेलाइट कम्युनिकेशन इंटरसेप्ट कर सकते हैं और प्रक्षेप पथ बदलकर उन्हें पृथ्वी पर क्रैश भी कर सकते हैं।
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रूस के ये स्पेसक्राफ्ट “नेस्टिंग डॉल” की तरह काम करते हैं, छोटे सब-सैटेलाइट छोड़ते हैं जो एंटी-सैटेलाइट हथियार छोड़ सकते हैं।
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अमेरिकी और ब्रिटिश सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, ये हथियार लो ऑर्बिट में परमाणु हमला कर सकते हैं, जिससे हजारों सैटेलाइट और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को खतरा होगा।
अमेरिका और यूरोप की तैयारी
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अमेरिका सैटेलाइट रिप्लेसमेंट और त्वरित तैनाती पर काम कर रहा है। 2023 में अमेरिकी स्पेस फोर्स ने केवल एक सप्ताह में नए सैटेलाइट को ऑर्बिट में लॉन्च किया था।
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यूरोपीय संघ और NATO ने स्पेस में रूस और चीन के हमलों का मुकाबला करने के लिए स्पेस शील्ड पर काम करने का निर्णय लिया है।
खतरे का आकलन
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जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के अनुसार, सैटेलाइट नेटवर्क आज हमारी जिंदगी की नींव बन चुका है। अगर इन पर हमला हुआ, तो पूरे देशों की बुनियादी सेवाएं ठप हो सकती हैं।
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भविष्य की लड़ाइयां अब ऑर्बिट में लड़ी जाएंगी, और रूस तथा चीन इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अंतरिक्ष में सैटेलाइट युद्ध अब कोई दूर का खतरा नहीं है। यह सीधे वैश्विक सुरक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकता है।
