
सोनभद्र, 14 फरवरी 2026 – उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की मारकुंडी घाटी सदियों पुरानी प्रेमकथा के लिए प्रसिद्ध है। वैलेंटाइन डे के मौके पर वीर लोरिक और मंजरी की यह लोकगाथा एक बार फिर चर्चा में है। यह कहानी बताती है कि सच्चा प्रेम समय, परिस्थितियों और सामाजिक बंधनों से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है।
लोकस्मृति में आज भी जीवित
जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित मारकुंडी घाटी की हरियाली और शांत पहाड़ियों के बीच वीर लोरिक और मंजरी की प्रेमकथा लोककथाओं और गीतों में आज भी जीवित है। वीर लोरिक केवल पराक्रमी योद्धा ही नहीं थे, बल्कि प्रेम में अडिग रहने वाले साहसी हृदय के व्यक्ति थे। मंजरी के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि उन्होंने सामाजिक चुनौतियों और अत्याचारी शासन को भी चुनौती दी।
कहानी का सार
लोककथाओं के अनुसार, उस समय घाटी में अत्याचारी राजा का शासन था। राजा ने गरीब लड़की मंजरी पर बुरी नजर डाल दी और जबरन विवाह करना चाहा। मंजरी ने वीर लोरिक को संदेश भेजकर मदद मांगी। लोरिक तुरंत उसकी रक्षा के लिए निकले और राजा मोलागत को युद्ध में पराजित कर मार डाला। इसके बाद लोरिक और मंजरी ने विवाह किया।
विवाह के बाद, मारकुंडी घाटी में आराम करते समय मंजरी ने अपने प्रेम की निशानी के लिए लोरिक से अनुरोध किया कि वे अपनी तलवार से एक विशाल पत्थर को काट दें। वीर लोरिक ने एक ही वार में पत्थर को दो भागों में काट दिया। यह पत्थर आज भी ‘वीर लोरिक पत्थर’ के नाम से जाना जाता है और सच्चे प्रेम और वीरता का प्रतीक बना हुआ है।
वैलेंटाइन डे पर श्रद्धालु और युवा
वैलेंटाइन डे के अवसर पर युवा इस ऐतिहासिक स्थल पर पहुंचकर प्रेम और त्याग की इस गाथा से प्रेरणा लेते हैं। यह दिन उनके लिए केवल आधुनिक उत्सव नहीं, बल्कि उस प्रेम की याद है जो साहस, त्याग और विश्वास पर टिका था। प्रेमी युगल यहां शपथ लेते हैं कि वे अपने प्रेम को जीवन पर्यंत बनाए रखेंगे।
संदेश
वीर लोरिक और मंजरी की प्रेमकथा आज भी यह संदेश देती है कि सच्चा प्यार सीमाओं और कठिनाइयों से परे होता है और वही प्रेम समय की कसौटी पर खरा उतरता है।
