
पटना, 14 फरवरी 2026 – बिहार की सियासत में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और AIMIM के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल इमान आमने-सामने आ गए हैं। विवाद के केंद्र में वंदे मातरम् का राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में महत्व और चुनावी राजनीति से जुड़ी धारणा है।
वंदे मातरम् को आजादी का महामंत्र बताया
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने अख्तरुल इमान के बयान पर पलटवार करते हुए कहा,
“वंदे मातरम् हमारे राष्ट्रीय शौर्य का प्रतीक है। यह राष्ट्रीय एकता और आज़ादी का महामंत्र है। जिन्हें अपने राष्ट्र से प्रेम है, उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हर हाल में लोगों को इसे स्वीकारना ही पड़ेगा।”
उन्होंने सरकारी विभागों में रिक्तियों और पारदर्शी नियुक्तियों पर भी जोर दिया। सिन्हा ने कहा कि युवाओं को अवसर मिलने चाहिए और प्रशासन सुचारू रूप से चलना चाहिए।
अख्तरुल इमान का संविधान और धर्मनिरपेक्षता पर जोर
वहीं, AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने वंदे मातरम् विवाद को ‘उन्मादी राजनीति’ करार दिया। उन्होंने कहा,
“भारतीय धर्मनिरपेक्षता हमें अपने धर्म को मानने और दूसरों का सम्मान करने की सीख देती है। संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपनी संस्कृति और रीति-रिवाजों के पालन की आजादी देता है। गांधीजी, नेहरू, पटेल और मौलाना आजाद जैसे राष्ट्रवादी नेताओं ने भी कभी 50 सालों तक अपने दफ्तरों पर तिरंगा नहीं फहराया, आज कुछ लोग देशभक्ति का सर्टिफिकेट दे रहे हैं।”
बंगाल चुनाव और ‘आनंदमठ’ का कनेक्शन
अख्तरुल इमान ने इस विवाद के पीछे चुनावी गणित होने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी की कृति ‘आनंदमठ’ का संबंध बंगाल से है। चूँकि बंगाल में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए जानबूझकर ऐसे मुद्दों को हवा दी जा रही है ताकि सामाजिक तनाव पैदा किया जा सके और राजनीतिक रोटियां सेंकी जा सकें।
