
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गर्माहट बढ़ती जा रही है। पश्चिमी यूपी में मुस्लिम वोट बैंक पर कब्जे की कोशिशें तेज़ हो गई हैं और इस क्षेत्र में नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कदम अब चर्चा का विषय बन गया है।
बहुजन समाज पार्टी (BSP) से राजनीति की शुरुआत करने वाले और मायावती के करीबी माने जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने हाल ही में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उनके समाजवादी पार्टी (SP) में शामिल होने की संभावना के बीच राजनीतिक माहौल और गरमाया है। सूत्रों के अनुसार, 15 फरवरी को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में लखनऊ में उनका पार्टी में शामिल होना तय है। उनके साथ कई पूर्व विधायकों के सपा में शामिल होने की भी चर्चा है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में मुस्लिम समुदाय में अपनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। आजम खान जेल में हैं और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है, इसलिए चुनाव के समय तक सपा को उनके समर्थन से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। ऐसे में नसीमुद्दीन के सपा में शामिल होने से पार्टी को मुस्लिम वोट बैंक में मजबूत पकड़ बनाने का मौका मिलेगा। साथ ही, यह कदम बसपा के कैडर वोट में सेंधमारी का अवसर भी पैदा कर सकता है।
वहीं, एआईएमआईएम (AIMIM) भी यूपी में मुस्लिम वोट बैंक तक अपनी पहुँच बढ़ाने में लगी हुई है। पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अपने प्रदर्शन से मुस्लिम समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत की थी। अब यूपी में पार्टी प्रमुख सांसद असदुद्दीन ओवैसी की योजना को प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली जमीन पर उतारने की कोशिश कर रहे हैं। शौकत अली लगातार बयान देकर भाजपा, सपा और कांग्रेस को निशाना बनाते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी यूपी के मुस्लिम वोटर भाजपा को हराने वाली किसी भी पार्टी के साथ जा सकते हैं। नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में शामिल होना सपा के लिए इस वर्ग के भरोसे को मजबूत करेगा। इसके साथ ही मायावती और कांग्रेस भी इस क्षेत्र में अपनी तैयारी और रणनीति को तेज कर रही हैं। कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका हो सकता है क्योंकि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने से पार्टी को विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को किसी रियायत देने की संभावना कम हो जाएगी।
