Saturday, February 14

$4.6 ट्रिलियन के ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में भारत को बनना होगा कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग हब: नीति आयोग

नई दिल्ली। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह देश का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात (Export) सेक्टर बन चुका है। हालांकि, नीति आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि भारत को 4.6 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में अग्रणी भूमिका निभानी है, तो उसे केवल असेंबली आधारित उत्पादन से आगे बढ़कर कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और वैल्यू एडिशन पर जोर देना होगा।

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नीति आयोग ने शुक्रवार को जारी अपनी रिपोर्ट ‘ट्रेड वॉच क्वॉर्टरली’ में कहा कि भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री अभी मुख्य रूप से मोबाइल फोन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इक्विपमेंट्स की असेंबली पर केंद्रित है, जिससे भारत फिनिश्ड गुड्स सप्लायर तो बन रहा है, लेकिन हाई-टेक कंपोनेंट्स और सप्लाई चेन के मामले में पिछड़ रहा है।

भारत की ग्रोथ दुनिया से कई गुना तेज

रिपोर्ट में बताया गया कि 2015 से 2024 के बीच भारत की ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स डिमांड में हिस्सेदारी 17.2% CAGR की दर से बढ़ी है, जबकि इसी अवधि में वैश्विक स्तर पर ग्रोथ केवल 4.4% रही।

नीति आयोग के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट फिलहाल 42.1 बिलियन डॉलर के करीब है, जबकि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार का आकार 4.6 ट्रिलियन डॉलर है।

पूर्वी एशिया का दबदबा, चीन-ताइवान आगे

नीति आयोग ने बताया कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार अभी भी काफी हद तक पूर्वी एशिया में केंद्रित है। चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और वियतनाम जैसे देश इंटीग्रेटेड सर्किट, सेमीकंडक्टर और अन्य हाई-टेक कंपोनेंट्स के निर्माण में अग्रणी हैं।

भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए इसी दिशा में मजबूती से आगे बढ़ना होगा।

असेंबली से आगे बढ़ना जरूरी

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत फिलहाल इलेक्ट्रॉनिक गुड्स की असेंबली करते हुए फिनिश्ड प्रोडक्ट्स का निर्यात बढ़ा रहा है, लेकिन देश में वैल्यू एडिशन, तकनीकी दक्षता और सप्लाई चेन इंटीग्रेशन के स्तर पर अभी भी कमजोरी बनी हुई है।

नीति आयोग ने सुझाव दिया कि भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में वैश्विक लीडर बनने के लिए रणनीतिक रूप से कंपोनेंट निर्माण, इनोवेशन और घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा।

कॉस्ट डिसएडवांटेज और एफटीए का लाभ उठाने की सलाह

नीति आयोग ने कहा कि भारत को अपने उत्पादन लागत से जुड़े नुकसान (Cost Disadvantage) को कम करना होगा। इसके साथ ही देश को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) का अधिकतम लाभ उठाते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को नई ऊंचाई तक ले जाने की जरूरत है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि स्ट्रैटेजिक कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है और इलेक्ट्रॉनिक्स के बड़े निर्यातक देशों की कतार में शामिल हो सकता है।

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